सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों के लिए व्यष्टितथा समष्टि स्तर पर किए आध्यात्मिक उपचारों का अध्यात्मशास्त्र
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा व्यष्टि स्तर पर साधकों के लिए किए गए उपचारों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा व्यष्टि स्तर पर साधकों के लिए किए गए उपचारों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार
‘बायो-वेल जी.डी.वी.’ (टिप्पणी १) नामक वैज्ञानिक उपकरण द्वारा ‘सूर्यनमस्कार करने से पहले तथा संबंधित मंत्रोच्चार सहित १२ सूर्यनमस्कार करने के बाद’ की रीडिंग ली गईं। इस उपकरण द्वारा व्यक्ति के कुंडलिनी चक्रों की स्थिति का अध्ययन किया जा सकता है।
MAV के शोध से सिद्ध हुआ है कि नामजप, यज्ञ और सात्विक जीवन शैली जैसी साधनाएं न केवल मनुष्य के सप्तचक्रों और ऊर्जा-क्षेत्र को शुद्ध करती है, बल्कि उसके आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक स्पंदन बढ़ाती हैं। वर्तमान समय में संतों ने विशेष रूप से “श्री राम जय राम जय जय राम” के जाप का मार्गदर्शन दिया है।
‘मनुष्य की विभिन्न कृतियां प्रधानता से सत्त्वगुणी, रजोगुणी अथवा तमोगुणी होती हैं । उन गुणों के अनुसार संबंधित कृति से स्पंदन प्रक्षेपित होते रहते हैं । ‘उच्च आध्यात्मिक स्तर के अर्थात ‘परात्पर गुरु’ स्तर के संतों के संदर्भ में यह कैसे होता है ?’, इसका अध्ययन किया गया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्ट दिखाई देने का क्या कारण है ? वर्ष २०११ एवं वर्ष २०१२ की अवधि में उस कमल की ४ पंखुडियां अस्पष्ट दिखाई देती थीं तथा वर्ष २०१३ में वे सुस्पष्ट दिखाई देने लगी । ‘कमल का सुस्पष्ट होना’ क्या दर्शाता है ?
वर्ष २०२१-२०२२ के मध्य ‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ उपकरण द्वारा परीक्षण करते समय, कुछ घटकों का प्रभामंडल (Aura) २३०० मीटर से भी अधिक पाया गया। स्थान की कमी के कारण इतनी विशाल दूरी को सटीक रूप से मापना संभव नहीं हो पा रहा था।
दावोस, स्विट्जरलैंड के ‘हाउस ऑफ पायोनियर्स’ में एक विश्व स्तरीय परिषद का आयोजन किया गया था । इस परिषद में ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ के प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
‘किसी भी प्रकार की बीमारी पर विजय प्राप्त करने हेतु शारीरिक उपचारों के साथ आध्यात्मिक स्तर के उपचार करना भी अत्यंत आवश्यक है’, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के शोध कार्य समूह के सदस्य श्री. शॉर्न क्लार्क (आध्यात्मिक स्तर ६७ प्रतिशत) एवं श्रीमती श्वेता क्लार्क ने किया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने वर्ष २०१४ में अध्यात्म की उच्च शिक्षा देना तथा आध्यात्मिक शोधकार्य करना, इन उद्देश्यों से ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ नामक न्यास की स्थापना की । इस न्यास की ओर से विभिन्न विषयों पर आध्यात्मिक शोध कार्य किया जाता है ।
इस लेख से हम गुरुदेवजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की आध्यात्मिक विशेषताएं समझ लेते हैं ।