Conversion: सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) में निर्धन तथा आदिवासी हिन्‍दुओं का धर्म परिवर्तन कराने वाले ४२ लोगों के विरुद्ध अपराध प्रविष्‍ट किया गया ।

देश में ऐसी घटनाएं इसलिए नहीं रुकीं क्‍योंकि देश में धर्मांतरण विरोधी कोई कठोर  कानून नहीं है तथा ऐसे लोगों के लिए कोई दंड नहीं है । हिन्‍दुओं को लगता है कि केंद्र सरकार को इसके लिए प्रयास करना चाहिए !

कर्नाटक के एक ईसाई मिशनरी स्कूल में हिन्दू बच्चों को भोजन में दिया जा रहा गोमांस !

देश में शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण के अपराध में लिप्त ईसाई मिशनरी स्कूलों पर प्रतिबंध लगाया जाए  !

११ अमेरिकी सांसदों द्वारा पाकिस्‍तान को वित्तीय सहायता रोकने की मांग !

भारत के कितने हिन्‍दू प्रतिनिधि पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में हिन्‍दुओं पर हो रहे अत्‍याचारों के विरुद्ध आवाज उठाते हैं ?

जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में ३१० लोगों का हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश !

अनेक शताब्दियों के पहले अथवा कुछ वर्ष पहले जिन्हें बल, लालच अथवा अन्य कारणों से हिन्दू धर्म का त्याग करना पडा और अब यदि वे हिन्दू धर्म में आना चाहते होंगे, तो ऐसे लोगों के लिए सरकार को ही आगे बढना चाहिए !

किसी को भी किसी भी विचारधारा को नष्ट करने का अधिकार नहीं है! – मद्रास उच्च न्यायालय

जनसामान्य का विचार है कि माननीय न्यायालय को मात्र फटकार लगाकर, निंद्य कृति करने वालों इस प्रकार छोडना नहीं चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिस के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और आरोपियों को बंदी बनाने का आदेश भी देना चाहिए !

Arunachal Christian Prayer Festival : इटानगर में ‘अरुणाचल ईसाई प्रार्थना महोत्सव’ को अनुमति देने पर, आदिवासी संगठनों द्वारा तीव्र विरोध !

बहुसंख्य हिन्दुओं के देश में उनका ही धर्मांतरण करने के प्रयास के कार्यक्रम को सरकार अनुमति देती है, इससे अधिक शोकजन्य क्या होगा ? इस हेतु हिन्दुओं के हित की रक्षा कर सकने वाले हिन्दू राष्ट्र की ही आवश्यकता है, यह समझें !

स्पेन में गत ८ दशकों में चर्च में ४ लाख लडकियों का लैंगिक शोषण !

‘चर्च अर्थात लैंगिक शोषण का स्थान’ और ‘पादरी अर्थात वासनांध व्यक्ति’, ऐसी प्रतिमा किसी के मन में निर्माण हो रही हो, तो इसमें गलत क्या है ? ऐसी घटनाओं के विरोध में जगभर के ईसाई खुले आम विरोध करते हुए क्यों नहीं दिखाई देते ?

लेबनान की ईसाई महिला भारत के मंदिर में बनी पुजारी !

लेबनान यह मध्य पूर्व का एक मुसलमान बाहुल्य देश है । वहां ईसाइयों की जनसंख्या ३२% है । इस देश की हनीन नाम की एक ईसाई महिला तमिलनाडु के कोयंबटूर में ‘ईशा योग केंद्र’ के मां लिंग भैरवी मंदिर की पुजारिन बनी है ।

स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध

आज भी एक ओर विश्व को ईसामय बनाने का षड्यंत्र सर्वत्र जोर-शोर से चल रहा है, तो दूसरी ओर ‘गजवा-ए-हिन्द’ आदि विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत विश्व को इस्लाममय बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं । इस वैश्विक परिस्थिति में हिन्दू विचारक, अध्येता स्वबोध एवं शत्रुबोध इन संज्ञाओं के प्रचलन के द्वारा हिन्दू समाज में जनजागरण का अभियान चला रहे हैं

तमिलनाडु का पर्वत जिस पर प्राचीन हिन्दू मंदिर है, उसका ईसाई नामांतरण करने की मांग का हिन्दुओं ने किया विरोध !

हिन्दू  राष्ट्र की आवश्यकता क्यों है ?, हिन्दुओं को कब ध्यान में आएगा कि ऐसी घटनाएं निरंतर यही दर्शा रही हैं ?