‘मुंबई के शिवाजी पार्क में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की एक बडी सभा हो’, यह २५ वर्षों से दबी (सुप्त) इच्छा ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के अवसर पर पूर्ण होना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘सनातन संस्था के संस्थापक, रामराज्य के समान ‘हिन्दू राष्ट्र (कलियुग के अंतर्गत सत्ययुग)’ स्थापित करने के लिए सूक्ष्म से कार्य करनेवाले, धर्मसंस्थापक, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ८३वें जन्मोत्सव और सनातन संस्था के ‘रजत जयंती महोत्सव’ के उपलक्ष्य में, १७ से १९ मई २०२५ की अवधि में गोवा के फर्मागुडी स्थित गोवा इंजीनियरिंग कॉलेज ग्राउंड में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ संपन्न हुआ । गुरुदेवजी की कृपा से शंखनाद महोत्सव आध्यात्मिक स्तर पर हुआ और गुरुदेवजी ने ‘सनातन राष्ट्र’ निर्माण होने का संकल्प किया

पू. शिवाजी वटकर

वर्ष १९९६ से १९९८ की अवधि में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की सार्वजनिक सभाएं हुआ करती थीं । सभा में औसतन ५ सहस्र साधक और जिज्ञासु उपस्थित रहते थे । उस समय मेरी इच्छा थी कि गुरुदेवजी की एक सार्वजनिक सभा मुंबई स्थित शिवाजी पार्क के विशाल (२८ एकड क्षेत्रफल) मैदान पर हो; क्योंकि उस समय अतिप्रतिष्ठित, अतिमहनीय और राजनीतिक नेताओं की सभाएं इस मैदान पर होती थीं । उनकी सभा में १ से २ लाख लोग उपस्थित रहते थे । मुझे लगा कि सभी राज्यों के साधक और मुंबई के लोग एकत्रित आएं, तो २५ सहस्र श्रोता जमा हो सकते हैं । मैंने शिवाजी पार्क के व्यवस्थापन, अर्थात मुंबई महानगरपालिका से पूछताछ की । उन्होंने मुझे बताया, ‘आप मैदान के एक कोने में सभा कर सकते हैं ।’ इस विषय में मैंने परात्पर गुरु डॉक्टरजी से पूछा । तब उन्होंने कहा, ‘‘अब वहां सभा नहीं चाहिए । आगे ईश्वरीय राज्य में हमारी बडी सभाएं होंगी ।’’ ‘मुंबई के शिवाजी पार्क में परात्पर गुरु डॉक्टरजी की एक बडी सभा हो’, यह मेरी दबी (सुप्त) इच्छा रही थी । वह इच्छा अब इस गोवा स्थित गोवा इंजीनियरिंग कॉलेज के (२३ एकड क्षेत्रफल के) मैदान में हुए महोत्सव के अवसर पर पूर्ण हुई । यह महोत्सव २-३ घंटों का नहीं, अपितु ३ दिन का था, साथ ही महोत्सव में भारत सहित २३ देशों के ३० सहस्र से अधिक लोग आए थे । उपस्थित लोगों में केवल जिज्ञासु और साधक नहीं, अपितु धर्माभिमानी, हिंदुत्वनिष्ठ नेता, पत्रकार, राजनीतिक नेता, साधक, संत, संप्रदायों के प्रमुख, अतिमहनीय व्यक्ति आदि थे । इससे यह ध्यान में आता है कि ‘परात्पर गुरु डॉक्टरजी का श्रीकृष्ण के समान धर्म की व्यवस्था स्थापित करने का अवतारी कार्य चल ही रहा है ।’


अन्य संगठनों की सभाओं और सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित सभाओं तथा महोत्सव में अनुभव किया गया भेद !

‘पहले मुंबई के शिवाजी पार्क में एक ही बडी सभा लेने की अपेक्षा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने साधकों को हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘हिन्दू राष्ट्र-जागृति सभा’ लेने के लिए कहा । इस प्रकार की सहस्रों सभाएं आयोजित की गईं । इन सभाओं को १ सहस्र से २५ सहस्र तक जिज्ञासु और हिन्दू धर्माभिमानी लोगों की उपस्थिति प्राप्त हुई । परिणामतः पूरे भारत में राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए हिन्दुओं का संगठन हो रहा है । इसके परिणामस्वरूप अब गोवा में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ संपन्न हुआ ।

अन्य संगठनों की सभाओं और सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित सभाओं तथा महोत्सव में मैंने जो भेद अनुभव किया, वह आगे दिया है ।

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‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने मुझे समष्टि के लिए उपरोक्त सूत्र सुझाए और मुझसे उन्हें लिखवा लिया’, इसके लिए मैं उनके चरणों में शरणागत भाव से कृतज्ञता व्यक्त करता हूं ।’

– (पू.) श्री. शिवाजी वटकर (आयु ७८ वर्ष, सनातन के १०२वें [समष्टि] संत), सनातन आश्रम, देवद, पनवेल. (२१.५.२०२५)

बुरी शक्ति : वातावरण में अच्छी तथा बुरी (अनिष्ट) शक्तियां कार्यरत रहती हैं । अच्छे कार्य में अच्छी शक्तियां मानव की सहायता करती हैं, जबकि अनिष्ट शक्तियां मानव को कष्ट देती हैं । प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के यज्ञों में राक्षसों ने विघ्न डाले, ऐसी अनेक कथाएं वेद-पुराणों में हैं । ‘अथर्ववेद में अनेक स्थानों पर अनिष्ट शक्तियां, उदा. असुर, राक्षस, पिशाच को प्रतिबंधित करने हेतु मंत्र दिए हैं ।’ अनिष्ट शक्तियों से हो रही पीडा के निवारणार्थ विविध आध्यात्मिक उपचार वेदादि धर्मग्रंथों में वर्णित हैं ।