राजमातंगीदेवी के विषय में
देवी मातंगी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री होने के कारण उन्हें ‘राजमातंगी’ कहा गया है । वर्तमान में संपूर्ण विश्व पर युद्ध का संकट मंडरा रहा है । ऐसे समय में तपोभूमि भारत की रक्षा के लिए ‘राजमातंगी’ देवी का कवच अत्यंत आवश्यक है ।
देवी मातंगी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री होने के कारण उन्हें ‘राजमातंगी’ कहा गया है । वर्तमान में संपूर्ण विश्व पर युद्ध का संकट मंडरा रहा है । ऐसे समय में तपोभूमि भारत की रक्षा के लिए ‘राजमातंगी’ देवी का कवच अत्यंत आवश्यक है ।
सनातन भारत : समाज, राष्ट्र, धर्म एवं अध्यात्म के संदर्भ में प्रासंगिक सूत्रों पर भाष्य करनेवाला स्तंभ
इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ‘यज्ञ में आने का प्रयास करूंगा’, ऐसा आश्वासन दिया । इस अवसर पर सनातन संस्था की श्रीमती धनश्री केळशीकर, श्री. अशोक दाभोलकर एवं श्री. प्रीतम नाचणकर उपस्थित थे ।
‘स्वबोध, मित्रबोध एवं शत्रुबोध’, यह त्रिसूत्री मुख्यतः राष्ट्रवाद, संस्कृति एवं भूराजनीतिक संदर्भ में उपयोग की जाती है । किसी भी जीवंत समाज अथवा राष्ट्र को यदि प्रगति करनी हो और अपना अस्तित्व बनाए रखना हो, तो उसे इन ३ बातों का सटीक ज्ञान होना अनिवार्य है ।
सनातन के रामनाथी, गोवा स्थित आश्रम में विहिंप के ‘ संत दर्शन एवं संवाद ’ उपक्रम के अंतर्गत भेंट करने के पश्चात आयोजित सत्कार समारोह में वे बोल रहे थे ।
एक समय ‘आर्यावर्त’ कहलानेवाले सनातन भारत का ‘आर्याणा’, अर्थात वर्तमान ईरान से तेल से भी अधिक गहरा ‘आर्य’ संबंध है । यह कथन केवल भावनात्मक नहीं है, इसके पीछे हजारों वर्षों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है ।
फरवरी २०२६ में वैश्विक वैज्ञानिक वृत्त में ‘क्वांटम एंटैंगलमेंट’ (Quantum Entanglement) विषय पर चीन के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी प्रयोग किया ।
श्री संस्थान गोकर्ण पुर्तगाली जीवोत्तम मठ के २४ वें पू. पीठाधिपति तथा श्रीराम के नि:स्सीम भक्त श्रीमद् विद्याधीश तीर्थ श्रीपाद वडेर स्वामीजी का सनातन आश्रम को मंगलमय चरणस्पर्श हुआ ।
मीडिया द्वारा की गई अपकीर्ति इतनी बडी थी कि उन्हें नौकरी एवं व्यवसाय में प्रत्येक स्थान पर प्रताडना झेलनी पडी । एक सामान्य किसान परिवार के इस निर्दोष साधक का जीवन जांच एजेंसियों के उत्पीडन एवं प्रगतिशील (पुरोगामी) तत्वों द्वारा की गई अपकीर्ति के कारण नष्ट हो गया ।
हिन्दवी स्वराज की स्थापना के काल में छत्रपति शिवाजी महाराज के सैनिकों ने जिन शस्त्रों का उपयोग किया, उन शस्त्रों को छात्रों ने प्रत्यक्ष हाथ में लेकर महाराज के सैनिकों के शौर्य का अनुभव किया ।