‘प्राच्यम् स्टुडियो’ के, अर्थात जगत के प्रथम ‘हिन्दू ओटीटी’के उद्गाता एवं ‘निर्भय हिन्दुत्वयोद्धा’ कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी (निवृत्त) !

हिन्दू धर्म पर होनेवाले जागतिक आक्रमणों का सामना करने के लिए धार्मिकता एवं आध्यात्मिकता का मिलाप कर संगठितरूप से उसका सामना करना चाहिए ।

योगाभ्यास करते समय यह करें !

व्यायाम प्रत्येक दिन थोडा-थोडा बढाते जाएं और स्वयं को सहन हो, इतना ही करें ।

कौन-से आसनों से किन रोगों पर लाभ होता है ?

१. शवासन : मानसिक तनाव, रक्तचाप, नींद न आना, हृदय रोग

आसन

योगशास्त्र में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए विविध आसन बताए हैं । योगसाधना में नाडीशोधन के लिए आसन करना  आवश्यक होता है ।

‘शीर्षासन करने से अमृतरस की रक्षा किस प्रकार होती है ?’, इस संदर्भ में श्री. राम होनप को प्राप्त सूक्ष्म ज्ञान !

‘सहस्रारचक्र के स्थान पर ईश्वरीय आनंद का वास रहता है । इसी आनंद को ‘अमृत’ की उपमा दी गई है ।

प्राणायाम कैसे करें ?

प्राणायाम करने के लिए प्रयत्नपूर्वक, सुनियंत्रित, दीर्घ; परंतु योग्य मात्रा में श्वास ली जाती है ।

प्राणायाम

प्राणायाम हठयोग और पातंजल (अष्टांग) योग का एक प्रमुख भाग है । आसनों के दीर्घ अभ्यास के कारण साधक प्राणायाम के लिए सिद्ध होता है ।

विज्ञान को असंभव लगनेवाली गतिविधियां योग के कारण संभव होना – वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित ब्योरा

वर्ष १९६२ में जो कामिया (Joe Kamiya) नामक जैवमानस वैज्ञानिक ने अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से पहली बार योगसिद्धियों के संदर्भ में विद्यमान वास्तविकताओं से संबंधित वैज्ञानिक ब्योरा प्रकाशित किया ।

क्रोध, लोभ, मत्सर और मन की चंचलता दूर करने का सरल उपाय ‘योगदर्शन’ !

सभी हिन्दू धर्मग्रंथ तथा धार्मिक साहित्य का उद्देश्य एक ही है और वह है कि मनुष्य को नीतिमूल्यों का आदर करना सिखाना ।

चित्तवृत्तियों का निरोध करना ही योग !

योगासन मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं, किंतु आध्यात्मिक व्यायाम हैं । मानसिक स्तर पर कार्य करनेवाले धर्मद्रोहियों का कार्य और उनके नाम कुछ वर्ष उपरांत किसी के ध्यान में नहीं रहते ।