देहली (दिल्ली) बमविस्फोट की घटना के पश्चात आधुनिक आतंकवाद का एक अत्यंत भयावह और नया पहलू सामने आया है । वह है ‘व्हाइट कॉलर’ (सुशिक्षित) जिहाद । फरीदाबाद के ‘अल-फलाह विश्वविद्यालय’ से संबंधित डॉक्टरों को बंदी बनाए जाने के पश्चात पूरे २,९०० किलो विस्फोटक बरामद किए गए । इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि आतंकवाद का स्वरूप अब गति से बदल रहा है । पारंपरिक आतंकवाद के परे जाकर उच्च शिक्षित, व्यावसायिक और सुसंस्कृत दिखनेवाले व्यक्तियों का सहभाग बढता जा रहा है । वे केवल कट्टर विचारधारा के अनुयायी नहीं होते; अपितु नियोजन, आर्थिक व्यवस्थापन और कार्यवाही के क्षेत्रों में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।

१. सुशिक्षित आतंकवादियों की बढती शृंखला
देहली की घटना में अब तक ७ डॉक्टरों के नाम आगे आए हैं । मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी विस्फोट के दिन विस्फोटकों से लदा हुआ वाहन चला रहा था । ६ डॉक्टरों को बंदी बनाया है तथा अब तक एक आतंकी फरार है । अन्वेषण में स्पष्ट हुआ है कि इन सभी के संबंध सीधे जैश-ए-मोहम्मद नामक पाकिस्तान पुरस्कृत संगठन से हैं ।
यह घटना कोई अचानक घटी नहीं है । पिछले कुछ वर्षाें से शिक्षित वर्ग में कट्टरता के बीज गहराई तक जा चुके हैं । लाल किला मेट्रो स्थानक के पास हुए विस्फोट के पहले दिन ही फरीदाबाद में जिहादी मॉड्यूल उजागर हुआ ।
आज आतंकवादी संगठन पारंपरिक धार्मिक शिक्षा पर निर्भर नहीं रह रहे; किंतु अभियंता, डॉक्टर, सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के (आई.टी.) विशेषज्ञ, संचार (कम्युनिकेशन) विशेषज्ञ और विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को अपना लक्ष्य बना रहे हैं । उनकी तकनीकी ज्ञानरूपी संपदा, आर्थिक क्षमता और नेटवर्किंग का कौशल आतंकवाद को अधिक घातक बनाता है ।
२. ‘व्हाइट कॉलर’ जिहाद : समाज, शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा के लिए तीनों स्तर पर संकट

‘व्हाइट कॉलर’ जिहाद मात्र सुरक्षा तंत्रों की समस्या नहीं है, वह समाज के विचार विश्व, शिक्षा संस्थान और बौद्धिक परिसंस्थाओं पर हो रहा आक्रमण है । इस प्रकार के आतंकवाद से सामना करने के लिए केवल शस्त्र नहीं, अपितु बौद्धिक, तकनीकी और नैतिक तैयारी आवश्यक है ।
३. दीर्घकालीन नियोजन की आवश्यकता
इस पृष्ठभूमि पर कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय करना आवश्यक है ।
अ. विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और गुप्तवार्ता की निगरानी बढाना : सुरक्षा अधिकारी अथवा कर्मचारी के रूप में सामान्य कर्मचारियों पर निर्भर न रहकर अनुभवी गुप्तवार्ता विशेषज्ञों को नियुक्त करना ।
आ. कट्टरतावादी ‘प्रोपागंडा’ के (प्रचारतंत्र के) स्रोत पहचानकर उन्हें नष्ट करना : ऑनलाइन कट्टरतावाद, सामाजिक माध्यमों के नेटवर्क, ‘एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन’ (सांकेतिक गुप्त संदेश) आदि का व्यवस्थापन करने के लिए सुदृढ ‘सायबर इंटेलिजेंस’ आवश्यक ।
इ. समुदाय स्तर पर जागरूकता और उत्तरदायित्व : मुसलमान समुदाय और उनके नेतृत्व को युवाओं का बुद्धिभेद (ब्रेनवॉशिंग) रोकने के लिए सक्रिय भूमिका अपनाना आवश्यक ।
ई. शिक्षा संस्थानों में विचारधारा पर आधारित हस्तक्षेप रोकना : कुछ संस्थान कट्टरता के केंद्र बन गए हैं । उनका परीक्षण, निरीक्षण और सुधार अनिवार्य होना चाहिए ।
उ. पुनर्वास एवं ‘डि-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम’ : राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक तथा समुदाय आधारित पुनर्वास की नीति बनाना ।
शिक्षा कट्टरतावाद का उपाय नहीं है । जो विचारधारा से प्रभावित होते हैं, वे कहीं भी जाते हैैं । जिहादी इस्लाम से संबंधित शिक्षा से कट्टरतावाद न्यून (कम) नहीं होता । कुछ लोग धार्मिक कट्टरतावाले गुटों के संपर्क में आते हैं और उन्हीं के साथ रहकर उनका बुद्धिभेद होता रहता है । इसलिए उच्च शिक्षित व्यक्ति भी आतंकवादी बनते हैं ।
‘व्हाईट कॉलर’ जिहाद की निरंतर परंपरा !

‘व्हाईट कॉलर’ जिहाद नया नहीं है । अनेक घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं ।
१. वर्ष १९९३ का मुंबई बमविस्फोट प्रकरण
‘सायन मेडिकल कॉलेज’ का एक ‘एम.बी.बी.एस.’ डॉक्टर ‘अब्दुल करीम टुंडा’ के संपर्क में आया और कट्टरतावादी कार्यवाहियों में सक्रिय हो गया । चिकित्सकीय ज्ञान के बल पर वह अत्याधुनिक ‘आयईडी’ बनाने में विशेषज्ञ सिद्ध हुआ ।
२. वर्ष २०१८ : कश्मीर विश्वविद्यालय का ‘पीएच.डी.’ (विद्यावाचस्पति) स्कॉलर (विद्वान)
समाजशास्त्र में ‘पीएच.डी.’ प्राप्त प्राध्यापक ने अध्यापन छोडकर हिजबुल मुजाहिदीन में प्रवेश किया और २ दिनों में एनकाउंटर में मारा गया ।
३. अक्टूबर २०२३ : उच्च शिक्षित इसिस मॉड्यूल
‘एन.आई.टी. माइनिंग इंजीनियर’, ‘ए.एम.यू.’ पदवीधर तथा गाजियाबाद का संगणक अभियंता, इन तीनों को इसिस मॉड्यूल चलाने के आरोप में बंदी बनाया गया । उन्होंने शिक्षा द्वारा प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर विस्फोटक बनाए ।
४. अक्टूबर २०२५ : पुणे का अल्-कायदा मॉड्यूल
सॉफ्टवेअर इंजीनियर को बंदी बनाया गया । वह अल्-कायदा के एक गुट से संबंधित था और ऑनलाईन कट्टरतावाद फैला रहा था । ‘आई.टी.’ की शिक्षा से प्राप्त कौशल का उपयोग कर उसने गुप्त डिजिटल नेटवर्क बनाया था ।
ये सभी उदाहरण सिद्ध करते हैं कि कट्टरतावाद शिक्षा से नहीं, किंतु विचारधारा से संबंधित होता है ।
– ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त)
४. निष्कर्ष
‘व्हाइट कॉलर’ जिहाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बडा और जटिल संकट बनता जा रहा है । वह आतंकवाद की नई सीढी का प्रतीक है, जहां शत्रु बंदूकधारी नहीं, अपितु लैपटॉप (भ्रमणसंगणक), ‘स्टेथोस्कोप’ (हृदय के स्पंदन जांचने के लिए डॉक्टरों द्वारा प्रयुक्त साधन), इंजीनियरिंग डिग्री (अभियंता पदवी) अथवा ‘रिसर्च पेपर्स’ (शोधनिबंध) हाथ में पकडा हुआ शिक्षित ‘जिहादी’ है । इस नई चुनौती का सामना करने के लिए भारत के समाज, राज्य और सुरक्षा व्यवस्था का एकत्रित उत्तर आवश्यक है । ‘व्हाइट कॉलर’ जिहाद की लडाई विचारधारा की लडाई है और उसमें जीतने के लिए जागरूकता, बौद्धिक सतर्कता एवं राष्ट्रीय एकात्मता अत्यावश्यक है ।
– ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त), पुणे. (१४.११.२०२५)
Varanasi Masjid Demolished : काशी में न्यायालय के आदेश से रेलविभाग की भूमि पर स्थित मस्जिद को ढहाया !
फ्रांस सरकार को अब ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति अपनानी चाहिए !
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
Japan Illegal Mosque : जापान में पाकिस्तान द्वारा निर्मित अवैध मस्जिद को ध्वस्त किया जाएगा !
Grooming Gangs : सांसद ने ब्रिटिश संसद में उपस्थित किया ‘ग्रूमिंग टोली’ का सूत्र
Hanif Sheikh Arrested : संदिग्ध निदा खान को आश्रय देनेवाले घर के मालिक हनीफ शेख को बंदी बनाया गया ।