सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
‘वर्तमान विद्यालयीन शिक्षा में स्वभावदोषों एवं दुर्गुणों पर कैसे विजय प्राप्त करनी चाहिए, इस विषय में कभी भी सिखाया नहीं जाता । यह वर्तमान शिक्षाप्रणाली का प्रमुख दोष है । अभिभावको, सनातन संस्था अपने बालसंस्कारवर्गाें के माध्यम से यह सिखा रही है ।’