सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘वर्तमान विद्यालयीन शिक्षा में स्वभावदोषों एवं दुर्गुणों पर कैसे विजय प्राप्त करनी चाहिए, इस विषय में कभी भी सिखाया नहीं जाता । यह वर्तमान शिक्षाप्रणाली का प्रमुख दोष है । अभिभावको, सनातन संस्था अपने बालसंस्कारवर्गाें के माध्यम से यह सिखा रही है ।’

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘हिन्दुओ, गत ९०० वर्षों की परतंत्रता का लज्जाजनक इतिहास मिटाने के लिए अब जागृत हो जाओ !’

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘बुद्धिप्रमाणवादियो में जिज्ञासा न होने से, उन्हें जितना ज्ञान है, उतने तक ही वे स्वयं को सीमित रखते हैं । उन्हें आगे की सूक्ष्म या उच्च बातों का ज्ञान नहीं हो पाता ।’

आइए भारत में पुनः एक बार ‘रामराज्य’ की ध्वजा स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध हो जाएं !

नववर्ष के शुभ मुहूर्त पर आइए, घर के बाहर ब्रह्मध्वज स्थापित करने के साथ-साथ रामराज्य के सिद्धांतों पर आधारित राष्ट्ररचना के लिए योगदान देने और साधना करने का संकल्प लें ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘बंगाल एवं केरल के हिन्दुओं ने ३० वर्ष से भी अधिक समय से साम्यवाद का स्वीकार किया है; इसलिए वे हिन्दुत्व से दूर हो गए । अत: उनमें धर्माभिमान नहीं बचा । इसलिए आज की स्थिति में वे मुसलमानों तथा ईसाइयों के आक्रमणों का सामना नहीं कर पा रहे हैं ।’

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘एक एटम बम में लाखों बंदूकों का सामर्थ्य होता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक बल में भौतिक, शारीरिक एवं मानसिक बल सेअनंत गुना सामर्थ्य होता है । इसी कारण धर्मप्रेमी यह चिंता न करें कि‘संख्याबल अल्प होने पर भी हिन्दू राष्ट्र कैसे साकार होगा ?’

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘मानव का जन्म क्यों हुआ ? जन्म के पूर्व वह कहां था ? मृत्यु के उपरांत वह कहां जाएगा ? इत्यादि विषयों की थोडी-बहुत भी जानकारी न रखनेवाले पश्चिमी तथा साम्यवादी क्या कभी मानवजाति की समस्याएं दूर कर पाएंगे ?

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘क्या इसे वास्तविक बुद्धिवादी का लक्षण माना जा सकता है – हमें जिस विषय की जानकारी नहीं है, जिस विषय का हमने अध्ययन नहीं किया, उस विषय पर समाज में संदेह निर्माण हो, इस प्रकार की बातें और काम करना ।’

हिन्दुओ, रामराज्य की स्थापना के लिए अपनी क्षमता के अनुसार अधिक से अधिक योगदान दो !

आज से ही स्वयं में और समाज में परिवर्तन लाने का संकल्प करें । प्रभु श्रीराम के चरणों में प्रार्थना करें – ‘हमें इस रामराज्य-स्थापना के शिवधनुष को धारण करने की शक्ति प्रदान करें !’