परिवार व्यवस्था, धर्मसंस्था एवं शिक्षाप्रणाली को साम्यवाद से संकट !
शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों को साम्यवाद से संकट !
शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों को साम्यवाद से संकट !
बंगाल में सुवेंदु सरकार के ‘पश्चिम बंगाल पशुवध नियंत्रण अधिनियम, १९५०’ नामक कानून को लागू करने के आदेश के विरुद्ध कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (सीपीआई-एमएल) की बंगाल शाखा ने कोलकाता उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की है ।
साम्यवादी विचारधारा के दिवंगत नेता कॉ. गोविंद पानसरे द्वारा ३७ वर्ष पूर्व लिखित ‘शिवाजी कोण होता ? (शिवाजी कौन था ?)’, इस विवादास्पद शीर्षकवाली पुस्तक के कारण यहां के शिवसेना विधायक श्री. संजय गायकवाड ने प्रकाशक प्रशांत आंबी को तीव्र शब्दों में फटकारा ।
साम्यवादी संगठनों की राष्ट्रविरोधी पृष्ठभूमि को देखते हुए ऐसे सभी संगठनों पर प्रतिबंध ही लगाया जाना चाहिए ।
कम्युनिस्ट अर्थात ही साम्यवादी किसी भी धर्म को नहीं मानते । संक्षेप में कहा जाए, तो उनके लिए सभी धर्म समान होते हैं । दूसरी ओर भारत में धर्मनिरपेक्षता होते हुए भी ‘समान नागरिकता कानून’ नहीं है । ऐसी स्थिति में इस संवैधानिक असंतुलन के विरोध में साम्यवादियों को आवाज उठानी चाहिए थी; परंतु ऐसा नहीं होता । इसका अर्थ साम्यवाद एक पाखंड है, ऐसा ही कहना पडेगा !
सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के लिए केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक सहायता किए जाने के विषय में सनातन संस्था की अपकीर्ति करने का प्रकरण l
वर्तमान में लोग ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’, ऐसे नारे सुनकर क्षोभ व्यक्त कर रहे हैं । यह क्षोभ अनुचित नहीं है; परंतु दुर्भाग्यवश वह केवल ऊपरी नारेबाजी तक ही सीमित है ।
जालना (महाराष्ट्र) के हिन्दुत्वनिष्ठ पार्षद श्री. श्रीकांत पांगारकर ने ‘सनातन प्रभात’के पास व्यक्त किया मानस
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि आज देश में धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र एवं संवैधानिक मूल्य संकट में हैं । देशभर में मुस्लिम एवं ईसाई जैसे अल्पसंख्यक समुदायों तथा उनके प्रार्थना स्थलों पर आक्रमण हो रहे हैं ।
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’के उपलक्ष्य में ‘सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन’के संस्थापक उदय माहूरकर से विशेष भेंटवार्ता l