‘तमिल राष्ट्र’ की ६० वर्ष की मांग वर्तमान में इतिहास के रूप में बताना ‘देशद्रोह’ नहीं है । – Madras High Court
किसी पुस्तक में वर्ष १९६७ की स्वतंत्र तमिलनाडू की मांग का केवल ऐतिहासिक उल्लेख करना वर्तमान समय में ‘देशद्रोह’ नहीं मन जा सकता । किसी ऐतिहासिक घटना का वर्णन करना तथा वर्तमान में अलगाववाद को बल देना इन दोनों बातों में स्पष्ट अंतर है ।