कॉ. गोविंद पानसरे हत्या प्रकरण
कोल्हापुर, १६ मार्च (संवाददाता) : श्रमिकों का संगठन ‘आईटक’ एवं ‘भारतीय कम्युनिस्ट दल’ ने कभी भी भारत में ‘समान नागरिकता कानून’ पारित होने की मांग के लिए आंदोलन नहीं किया । हमारी बैठकों में कभी भी समान नागरिकता कानून बनाए जाने से संदर्भ में चर्चा नहीं हुई, ऐसा उत्तर भारतीय कम्युनिस्ट दल के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं कॉ. गोविंद पानसरे की हत्या के साक्षी शशिकांत पाटिल ने दिया । अधिवक्ता सोमनाथ भरमगुंडे पाटिल का प्रतिपरीक्षण कर रहे हैं । इसके अंतर्गत उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए शशिकांत पाटिल ने उक्त उत्तर दिया । कॉ. पानसरे हत्या प्रकरण की सुनवाई यहां के जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस्.एस्. तांबे के सामने चल रही है ।
इस समय बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता समीर पटवर्धन, अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, अधिवक्ता नागेश जोशी; जबकि सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिवाजीराव राणे उपस्थित थे । इस प्रकरण की अगली सुनवाई ८ अप्रैल को होनेवाली है ।
संपादकीय भूमिकाकम्युनिस्ट अर्थात ही साम्यवादी किसी भी धर्म को नहीं मानते । संक्षेप में कहा जाए, तो उनके लिए सभी धर्म समान होते हैं । दूसरी ओर भारत में धर्मनिरपेक्षता होते हुए भी ‘समान नागरिकता कानून’ नहीं है । ऐसी स्थिति में इस संवैधानिक असंतुलन के विरोध में साम्यवादियों को आवाज उठानी चाहिए थी; परंतु ऐसा नहीं होता । इसका अर्थ साम्यवाद एक पाखंड है, ऐसा ही कहना पडेगा ! |

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