छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन में उल्लेख (बिना आदर दिए उल्लेख करना) सहन नहीं करेंगे ! – विधायक संजय गायकवाड, शिवसेना

कॉ. गोविंद पानसरे की पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता ?’ के प्रकाशक को फटकार !

‘कॉ. गोविंद पानसरे की पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता ?’ एवं शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड

बुलढाणा – हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक तथा हिन्दुओं के श्रद्धास्थान छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन में उल्लेख कर (बिना आदर दिए उल्लेख कर) उनका अपमान किया गया । साम्यवादी विचारधारा के दिवंगत नेता कॉ. गोविंद पानसरे द्वारा ३७ वर्ष पूर्व लिखित ‘शिवाजी कोण होता ? (शिवाजी कौन था ?)’, इस विवादास्पद शीर्षकवाली पुस्तक के कारण यहां के शिवसेना विधायक श्री. संजय गायकवाड ने प्रकाशक प्रशांत आंबी को तीव्र शब्दों में फटकारा । उन्होंने भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन में उल्लेख सहन नहीं किया जाएगा । उनका अनादर करनेवालों तथा उन्हें एकवचन में संबोधित करनेवालों को समय रहते सबक सिखाना चाहिए’ । श्री. गायकवाड ने चलचित्र (वीडियो) प्रसारित कर अपनी भूमिका प्रस्तुत की ।

प्रकरण क्या है ?

‘विश्व पुस्तक दिन’ के अवसर पर इस पुस्तक का विषय पुन: समक्ष आया । शिवसेना विधायक श्री. संजय गायकवाड ने प्रकाशक से संपर्क किया । इस समय उन्होंने कहा कि ‘यद्यपि ‘शिवाजी कोण होता ? (शिवाजी कौन था ?)’ यह पुस्तक ३७ वर्ष पूर्व लिखी गई है, तथापि पुस्तक के शीर्षक में महाराज का उल्लेख एकवचन में क्यों है ? छत्रपति शिवाजी महाराज का एकवचन में उल्लेख करनेवाले गोविंद पानसरे कौन थे ? मुझे यह पुस्तक पढने की आवश्यकता नहीं है । आप जैसे लोग छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख अपमानजनक भाषा में करते हैं ।’

इस अवसर पर प्रकाशक प्रशांत आंबी ने कहा कि ‘शिवाजी कोण होता ?’ यह पुस्तक मैंने नहीं, अपितु गोविंद पानसरे ने लिखी है । यह पुस्तक वर्ष १९८८ में प्रकाशित हुई थी । इस पुस्तक में शिवराय का अपमान करने का कोई हेतु नहीं है, आप पहले वह पुस्तक पढें ।’ तथापि, ‘महाराज के सम्मान के सम्मुख अन्य कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है । छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान हेतु हम किसी भी परिणाम की चिंता नहीं करेंगे’, ऐसा कहते हुए विधायक गायकवाड ने उन्हें कठोर शब्दों में चेतावनी दी ।

विधायक गायकवाड के वक्तव्य पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का संताप !

इस प्रकरण में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने विधायक गायकवाड की आलोचना की । उन्होंने कहा कि ‘गायकवाड ने जिले का नाम कलंकित करने का बीडा उठाया है । एक जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग करना गंभीर है । इससे छत्रपति शिवराय के मूल्यों को क्षति पहुंच रही है ।’ (शिवसेना विधायक श्री. संजय गायकवाड की प्रतिमा मलिन करने का ही यह प्रयास है । धर्म के लिए आक्रामक होनेवाले जनप्रतिनिधि को ‘अपात्र’ सिद्ध करना कांग्रेस की पुरातन रणनीति है । जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य की मूल विचारधारा को त्याग कर केवल मतों के लिए तुष्टीकरण किया, उन्हें महाराज के सम्मान का मूल्य क्या ज्ञात होगा ? – संपादक)

सपकाल ने मांग की कि ‘गायकवाड ने ‘पानसरे का जो हुआ वही करेंगे’, ऐसी धमकी दी है । इस विधान की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए’ । (पुस्तकों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का विकृतीकरण करने का प्रयास होते समय, उस विषय में भी मौन रहनेवाले सपकाल ! पुस्तक के शीर्षक में महाराज के हुए अनादर के विषय में भी सपकाल शांत क्यों हैं ? – संपादक)

(और इनकी सुनिए..) ‘बुलढाणा में कॉमरेड गोविंद पानसरे की पुस्तक का सार्वजनिक वाचन करेंगे !’ – अधिवक्ता असीम सरोदे

पुणे – अधिवक्ता असीम सरोदे ने बयान दिया है कि “कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित विवादास्पद पुस्तक ‘शिवाजी कौन थे ?’ (शिवाजी कोण होता ?) का बुलढाणा में सार्वजनिक रूप से वाचन किया जाएगा । देखते हैं शिवसेना विधायक श्री संजय गायकवाड क्या करते हैं ।” उन्होंने यह भी कहा कि वे शीघ्र ही श्री गायकवाड के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे ।

संपादकीय भूमिका

  • ऐसी विनाशकारी प्रवृत्तियों द्वारा समाज में वैमनस्य उत्पन्न करने के उद्देश्य से यदि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, तो प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन पर तत्काल प्रतिबंध लगाना चाहिए !
  • यह जानते हुए कि सभी प्रगतिशील, वामपंथी और हिन्दू-विरोधी तत्व हिन्दुओं के विरुद्ध एकजुट हो रहे हैं, हिन्दुओं का भी संगठित होना आवश्यक है !