जालना (महाराष्ट्र) के हिन्दुत्वनिष्ठ पार्षद श्री. श्रीकांत पांगारकर ने ‘सनातन प्रभात’के पास व्यक्त किया मानस
एक बार हिन्दू धर्म के प्रति अटूट प्रेम एवं अभिमान उत्पन्न होने से वह व्यक्ति उसके व्यक्तिगत जीवन में चाहे कितने भी कठिन प्रसंग आए, तो वह पूरे जीवनभर धर्मरक्षा हेतु कार्यरत रहता है । ऐसे असंख्य धर्मनिष्ठों के धर्म के प्रति असामान्य त्याग के कारण ही आक्रांताओं ने हिन्दू धर्म की निरंतर रक्षा होती आई है । वर्तमान समय का ऐसा एक उदाहरण है जालना के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा पार्षद के रूप में पुनः एक बार चुकनर आए श्री. श्रीकांत पांगारकर ! वर्तमान की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था ने उन्हें साम्यवादी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के प्रकरण में फंसाने का प्रयास किया । उन्हें ८ वर्ष तक कारागृह में बंद कर उनका उत्पीडन किया; परंतु इतना सब होकर भी उनका धर्मप्रेम एवं हिन्दुओं में जागृति लाने की उनकी लगन लेशमात्र भी अल्प नहीं हुई । समाज एवं धर्मकार्य करने हेतु वे पुनः एक बार जालना में निर्दलीय पार्षद के रूप में चुनकर आए हैं । इस संदर्भ में ‘सनातन प्रभात’ने जालना के इस हिन्दुत्व के वीर के साथ चल दूरभाष पर की गई भेंटवार्ता हम प्रकाशित कर रहे हैं ।

१. प्रश्न : पहले ‘सनातन प्रभात’की ओर से आपका अभिनंदन ! इतने कठिन समय से बहुत कष्ट सहन कर आप यहां तक आ पहुंचे हैं, इस विषय में आपको क्या लगता है ? आपकी क्या भावनाएं हैं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मुझ पर ईश्वर की यह कृपा ही है कि इस कठिन काल में स्थिर रह पाया । माता जगदंबा की कृपा से मुझे सबकुछ भोगने की शक्ति मिली । ईश्वर ने ही मुझ में यह सब सहन करने की क्षमता उत्पन्न की तथा उससे सबकुछ सुलभ होता गया । वर्तमान का परिदृश्य देखा जाए, तो मेरे प्रभाग की जनता मेरे साथ खडी रही ।
२. प्रश्न : गौरी लंकेश हत्या प्रकरण में आपको कारागृह में रहना पडा । इस अन्याय की ओर आप कैसे देखते हैं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मैं वर्ष २०१८ से २०२४ तक ६ वर्ष तक कारागृह में था । मैं संपूर्णरूप से निर्दाेष था, तब भी मुझे इसमें फंसाया गया । मुझे ऐसा लगता है कि जब तक आरोप सिद्ध नहीं होते, तब तक कारागृह में रखना अत्यंत अनुचित है । १-२ वर्षाें में सुनवाई आरंभ कर निर्णय दिया जाना चाहिए । न्यायालय में अभियोग चलाए बिना ६ वर्षाें तक कारागृह में रखना अत्यंत अनुचित है । इससे मेरे जीवन के जो बहुमूल्य ६ वर्ष व्यर्थ गए, क्या वह मुझे वापस मिलनेवाले हैं ?
३. प्रश्न : गौरी लंकेश प्रकरण के काले अध्याय के उपरांत भी लोगों ने आप से प्रेम कर आपको चुना । आपने कैसे लोगों का इतना प्रेम प्राप्त किया ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मुझ पर आरोप लगाकर हाल ही में मुझे बंदी बनाया गया । मूलतः मैं वर्ष २००१ से २०११ की अवधि में शिवसेना से पार्षद रह चुका हूं । मेरे प्रभाग की जनता को मेरा स्वभाव ज्ञात है । गौरी लंकेश प्रकरण में मेरा नाम आकर भी जनता को यह ज्ञात था कि मैं निर्दाेष था ! उसके कारण जनता ने मुझे पुनः विजयी बनाया ।
४. प्रश्न : साम्यवादियों ने झूठा प्रचार कर आपकी प्रतिमा धूमिल करने का प्रयास किया । आपने इसे कैसे तोड डाला ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मूलतः मेरा कोई दोष न होते हुए भी मुझे बंदी बनाया गया था, अतः यातनाएं भुगतने बिना मेरे सामने अन्य कोई विकल्प नहीं था; परंतु अंदर से ईश्वर की प्रेरणा थी । अधिवक्ताओं से हमें लोकतांत्रिक पद्धति से लडने के लिए दिशादर्शन भी मिल रहा था । इसके कारण ही मैं यह सब भुगत पाया ।
५. प्रश्न : आपने हिन्दुत्व के लिए इतना कुछ भुगता । आप इस सबसे तपकर बाहर निकले हैं, तो वर्तमान में आपके मन की क्या धारणा है ?- एक राजनेता के रूप में तथा एक हिन्दुत्वनिष्ठ के रूप में ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मुझे मेरा दायित्व ध्यान में आया । लोगों का विश्वास प्राप्त करना तथा उसे टिकाए रखने हेतु निरंतर सजग रहकर प्रयास करते रहना चाहिए, इसका मुझे भान हुआ ।
६. प्रश्न : एक पार्षद के रूप में आपकी आगे की क्या योजनाएं हैं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : पार्षद के रपू में नागरिकों को उनके लिए आवश्यक नित्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, तो मैं करता ही रहूंगा, उदा. बिजली की आपूर्ति, पानी की आपूर्ति, पथदीपों की व्यवस्था आदि; परंतु उसके साथ ही अपराधों की जड मादक पदार्थाें का व्यापार है । इसलिए मैं इसके विरोध में अभियान चलानेवाला हूं, साथ ही महिलाओं की रक्षा के लिए भी मैं प्रयासरत रहूंगा ।
७. प्रश्न : वर्तमान में हिन्दू समाज लव जिहादविरोधी कानून की मांग कर रहा है, तो इसके लिए आप आपके प्रभाग में क्या प्रयास करेंगे ? कुल मिलाकर हिन्दुओं में धर्म के प्रति जागृति आए, इसलिए आपकी कोई योजना है ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : जी हां ! मैं लव जिहादविरोधी कानून बनने के लिए प्रयास करूंगा । लडकियों एवं महिलाओं में निरंतर जागृति लाने हेतु मैं एक योजना बनाऊंगा । इसमें मैं उन्हें स्वयं की रक्षा करने हेतु स्वरक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनेवाला हूं । इसके साथ युवकों को उनका शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा बनाए रखने हेतु पुनः व्यायामशालाएं आरंभ करने हेतु प्रयास करूंगा । मैं हिन्दुओं मे निरंतर जागृति लाने का प्रयास करूंगा । समाज को अच्छे-बुरे का भान कराकर उसे अच्छे पथ पर ले जाने का प्रयास करूंगा । कुल मिलाकर हिन्दूसंगठन समय की मांग है तथा उसके लिए मैं मेरे प्रभाग में प्रयास करनेवाला हूं ।
८. प्रश्न : राजनीतिक दलों में टूट होना, विद्रोह आदि समस्याओं ने राजनीतिक क्षेत्र को विशेषकर महाराष्ट्र को ग्रस्त किया है । इसविषय में आपके क्या विचार हैं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : वर्तमान में यह स्थिति है कि किसी राजनीतिक दल के पास सिद्धांत शेष नहीं रहे हैं । जनता इसे भलीभांति जानती है । एक न एक दिन जनता की भावना का विस्फोट होने ही वाला है ।
९. प्रश्न : हिन्दुत्व के लिए आपने बहुत कष्ट उठाएं हैं तथा यातनाएं झेली हैं । हिन्दुत्व के व्यापक हित के लिए आपका यह त्याग है, यह हमारी धारणश है । आप साम्यवादियों के षड्यंत्र का शिकार हुए । इसमें आपको वर्तमान व्यवस्था में स्थित कौनसी त्रुटियां ध्यान में आईं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : जैसे हम हिन्दुत्वनिष्ठों को बंदी बनाया गया, उसप्रकार कुछ शहरी नक्सलियों को भी बंदी बनाया गया था, तथापि प्रसारमाध्यम उनके संदर्भ में समाचार प्रसारित करते ुसमय उनका सकारात्मक चित्रण कर रहे थे, जबकि हम हिन्दुत्वनिष्ठों के संदर्भ में प्रसारित किए जानेवाले समाचार अनुचित एवं नकारात्मक होते थे । इससे सीख लेकर हिन्दुओं को सजग होकर उन्हें किसका समर्थन करना है, इसका विवेक से निर्णय लेना पडेगा ।
१०. प्रश्न : ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों के कारण हिन्दुओं में जागृति आई । कश्मीरी हिन्दुओं का विषय करोडों हिन्दुओं तक पहुंचा; परंतु आज भी देखा जाए, तब भी कश्मीरी हिन्दुओं के लिए लडनेवाला ‘पनून कश्मीर’ जैसा संगठन तथा इस संगठन को कुछ चुनिंदा हिन्दुत्वनिष्ठ ही सहायता कर रहे हैं । तो हिन्दुओं में किसप्रकार जागृति लानी चाहिए, ऐसा आपको लगता है ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों के माध्यम से हिन्दू समाज में क्षणिक क्षोभ तो उत्पन्न होता है; परंतु कालांतर से हिन्दू समाज अपने काम में व्यस्त हो जाता है तथा धीरे-धीरे उसके मन से हिन्दू जागृति का विषय धुंधला होता जाता है । वास्तव में ऐसी फिल्म के उपरांत हिन्दुओं को निरंतर प्रेरित कर उनमें जागृति लाना आवश्यक है ।
११. प्रश्न : एक हिन्दुत्वनिष्ठ पार्षद के रूप में आप स्थानीय स्तर पर हिन्दुत्व का कार्य बढाने हेतु क्या प्रयास करनेवाले हैं ?
श्री. श्रीकांत पांगारकर : मैं ‘कोदंड प्रतिष्ठान’ नाम का संगठन बनानेवाला हूं । उसकी प्रक्रिया चल रही है । उस माध्यम से हिन्दुओं में धर्म के प्रति जागृति लाना, समाज को निर्व्यसनी बनाने हेतु प्रयास करना, महिलाओं की रक्षा हेतु अभियान चलाना, साथ ही ‘लव जिहाद’ के प्रकरण हाथ में लेना आदि प्रयास करने का हमारा प्रयास रहेगा ।
आप के कार्य के लिए हमारी शुभकामनाएं तथा आप पुनः एक बार पार्षद बन गए; इसके लिए आपका पुनः एक बार मन:पूर्वक अभिनंदन !
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