(और इनकी सुनिए…) ‘पुरातत्व विभाग का खर्च हिन्दू पक्ष के न देने से ज्ञानवापी का सर्वेक्षण त्वरित रोका जाए !’ – अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी
हिन्दू पक्ष द्वारा पूरा खर्च उठाने का न्यायालय द्वारा आदेश देने का कमिटी का दावा
हिन्दू पक्ष द्वारा पूरा खर्च उठाने का न्यायालय द्वारा आदेश देने का कमिटी का दावा
‘शिवाजी का मुख्य सेनापति मुसलमान था । उन्हें अपने लोगों पर (हिन्दुओं पर) विश्वास नहीं था । उस समय हिन्दू मुसलमान भेद ही नहीं था ।’ ऐसा छत्रपति शिवाजी महाराजजी का एकेरी उल्लेख करते हुए विषवमन !
ज्ञानवापी के सर्वेक्षण का दूसरा दिन
५ कलश के साथ पाई गई कमल की आकृति !
२ फुट का मिला त्रिशूल !
१५ अगस्त १९४७ को ज्ञानवापी का क्या परिचय था ? – न्यायालय का मुसलमान पक्ष से प्रश्न
कांग्रेसियों से इससे भिन्न अपेक्षा भी क्या हो सकती है ? यदि बोरा ने अन्य धर्मियों के श्रद्धास्रोतों के विषय में इस प्रकार का वक्तव्य दिया होता, तो अब तक उनका सर धड से जुदा करने के फतवे निकल गए होते !
अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी ने उच्च न्यायालय में न जाकर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी । उस पर न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय में जाने का आदेश दिया था ।
औरंगजेब प्रात:स्मरणीय नहीं, अपितु छत्रपति शिवाजी महाराज एवं धर्मवीर संभाजी महाराज हमारे लिए प्रात:स्मरणीय हैं । हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गए नाम बदलने के पीछे अपनी संस्कृति नष्ट करना ही इन आक्रमकों का षड्यंत्र था ।
उत्तर प्रदेश शिक्षा मंडल ने राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में परिवर्तन किया है । अब पाठ्यपुस्तक के माध्यम से स्वातंत्र्य वीर सावरकर समेत ५० महापुरुषों की जीवन गाथा पढाई जाएगी ।
जिस क्षेत्र का हमें ज्ञान नहीं है, उसके विषय में अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन तो न करें, यह सरल एवं सीधा सामाजिक नियम भी न जाननेवाले हिन्दूद्वेषी स्वयं का ही उपहास उडा रहे हैं !
भारत का असत्य इतिहास सिखानेवाले अंग्रेजों द्वारा रचित षड्यंत्र को ध्वस्त करने के लिए शैक्षिक क्रांति होना अति आवश्यक !