परिवार का आरोप: पुलिस अधिकारी शाहिद अली ने धार्मिक आधार पर मानसिक प्रताडना की जिसके फलस्वरूप आत्महत्या हुई ।
विभागीय जांच जारी

बदायूं (उत्तर प्रदेश) — न्यायिक सुरक्षा में तैनात पुलिस निरीक्षक मेघश्याम गौतम की फांसी लगाकर आत्महत्या करने की दु:खद घटना उजागर हुई है । उन्होंने आत्महत्या से पूर्व कोई आत्महत्या संदेश नहीं छोडा; किन्तु परिवार ने आरोप लगाया है कि “पुलिस निरीक्षक शाहिद अली, मेघश्याम को मानसिक रूप से भीषण कष्ट देते थे, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या की” । इस आरोप के उपरांत विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं ।
धार्मिक कारणों से प्रताडना का आरोप
मेघश्याम के पुत्र ने बताया कि मेघश्याम धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे । उन्होंने गुरु से दीक्षा ली हुई थी एवं भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण में उनकी अनन्य श्रद्धा थी । वे कार्यालयीन सेवा पर भी तिलक लगा कर जाते थे, जिस पर शाहिद अली को आपत्ति थी । शाहिद अली कहते थे, “क्या तुम पंडित लोग यह तिलक–बिलक लगाते हो ?” इस पर मेघश्याम ने उत्तर भी दिया था कि “यदि आप नहीं मानते हैं तो क्या हुआ, हम तो मानते हैं ।” (यदि किसी अल्पसंख्यक हिन्दू अधिकारी ने पाकिस्तान में किसी मुसलमान अधिकारी से ऐसा कहा होता तो क्या होता – इस का विचार करिए किन्तु भारत में धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक मुसलमान हिन्दुओं पर प्रहार/उत्पीडन करते हैं एवं हिन्दू चुपचाप सहन करते हैं, यह हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद स्थिति है – संपादक)
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
पुत्र ने बताया कि कार्यालय में हुई ऐसी घटनाओं के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण पिता प्राय: बीमार पड जाते थे एवं छुट्टी लेते थे । वे गत १५ दिनों से अत्यंत तनाव में थे एवं स्थानांतरण के संबंध में चर्चा करते रहते थे । उन्होंने परिवार से कहा था कि यदि उनका स्थानांतरण नहीं हुआ तो उनके साथ वहां कुछ अनुचित घटना हो सकती है ।
“जांच कर कार्रवाई की जाएगी” – पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने सूचित किया कि परिजनों से आरोप प्राप्त हुए हैं । परिजनों ने कुछ दूरभाष वार्ता अंकन(‘कॉल रिकॉर्डिंग्स) एवं अन्य प्रमाण उनके पास होने की सुचना दी है, जिन्हें जांच संस्थानों को सौंपा जाएगा । विभागीय अभिलेखों में पहले ऐसा कोई आरोप प्रविष्ट नहीं था; तदापि पारिवारिक द्वारा दिए जाने वाले प्रमाणों की जांच की जाएगी एवं जांच में निष्पन्न तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी
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