पंढरपूर स्थित श्री विठ्ठल मूर्ति पर रासायनिक लेपन करने का वारकरी संप्रदाय द्वारा तीव्र विरोध : रासायनिक लेपन के कारण मूर्ति की क्षति !

पंढरपूर – श्री विठ्ठल की मूर्ति वारकरी संप्रदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है । मूर्ति के निरंतर क्षरण (घिसने) के कारण महापूजा बंद कर दी गई है, साथ ही आज तक ३ बार रासायनिक प्रक्रिया द्वारा क्षरण को न्यून करने का प्रयास किया गया; किंतु रासायनिक लेपन निष्प्रभावी है तथा इससे मूर्ति की क्षति हो रही है । अतः किसी भी परिस्थिति में श्री विठ्ठल की मूर्ति पर रासायनिक लेपन न किया जाए, ऐसी दृढ मांग वारकरी संप्रदाय के प्रमुखों ने जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में की । मूर्ति के परिरक्षण एवं संवर्धन के लिए वारकरी संप्रदाय की एक समिति स्थापित की जाए, जिसके माध्यम से देशभर के विशेषज्ञ मूर्ति-अध्येताओं को आमंत्रित किया जाए । मूर्ति-लेपन विशेषज्ञों के विचार जानकर ही अगला निर्णय लिया जाए, ऐसी मांग उस बैठक में की गई । रासायनिक लेपन का इससे पूर्व महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने भी तीव्र विरोध किया है । (वास्तव में देवता की मूर्ति पर किसी भी प्रकार का रासायनिक लेपन करना पूर्णतः धर्मशास्त्र-विरुद्ध कृति है । मूल से निवारण न कर रासायनिक लेपन जैसी ऊपरी उपाय योजना करने से देवता की मूर्ति पर विपरीत प्रभाव पड सकता है, यह भी ध्यान में रखना चाहिए । रासायनिक लेपन का मंदिर महासंघ तथा वारकरी संप्रदाय द्वारा तीव्र विरोध होने पर भी प्रशासन बार-बार लेपन का आग्रह क्यों कर रहा है ? इससे पूर्व ३ बार जो लेपन किया गया, उसका प्रतिवेदन (रिपोर्ट) मंदिर समिति घोषित करे, साथ ही जिन्होंने यह लेपन किया, उसके लिए उत्तरदायी कौन है ? यह भी घोषित होना चाहिए ! – संपादक)

इस बैठक के लिए सोलापूर के जिलाधिकारी कार्तिकेयन एस., मंदिर समिति के सह-अध्यक्ष ह.भ.प. गहिनाथ औसेकर महाराज, ‘वारकरी पाईक संघ’ के संस्थापक ह.भ.प. देवव्रत (राणा) महाराज वासकर, ह.भ.प. भागवत महाराज शिरवलकर, ह.भ.प. रघुनाथ महाराज कबीर, ह.भ.प. रामकृष्ण महाराज वीर, ह.भ.प. बापू महाराज उखलीकर सहित अन्य उपस्थित थे ।

इस संदर्भ में वारकरी संप्रदाय ने देवस्थान समिति को एक विस्तृत निवेदन दिया है, जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि इस लेपन के कारण कोल्हापूर स्थित श्री महालक्ष्मी देवी की मूर्ति की किस प्रकार क्षति हो रही है । इस बैठक में वारकरी संप्रदाय के प्रमुखों ने रासायनिक लेपन पर घोर आपत्ति जताते हुए, किसी भी परिस्थिति में पदस्पर्श दर्शन बंद नहीं होना चाहिए, ऐसी आग्रही मांग की ।

आषाढी (एकादशी) से पूर्व लेपन करने का प्रयास ! – कार्तिकेयन एस., जिलाधिकारी

बैठकी के उपरांत वार्ता करते हुए सोलापूर के जिलाधिकारी कार्तिकेयन एस. ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में वारकरी संप्रदाय के प्रमुख जनों के साथ चर्चा की गई है । उनकी मांग के अनुसार इपॉक्सी लेपन (रासायनिक लेपन) नहीं किया जाएगा, अपितु ‘स्टोन’ (पाषाण) चूर्ण से मूर्ति के क्षरण की पूर्ति की जाएगी । इसके लिए देशभर के श्रेष्ठ अध्येताओं एवं विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा । आगामी सप्ताह में श्री विठ्ठल की मूर्ति अध्येताओं सहित महाराज मंडली को दिखाकर निरीक्षण किया जाएगा । आषाढी एकादशी से ३ दिन पूर्व पदस्पर्श दर्शन बंद रखकर एवं मुखदर्शन चालू रखकर, मूर्ति के स्वरूप को परिवर्तित किए बिना क्षरण-पूर्ति की प्रक्रिया की जाएगी ।’’

संपादकीय भूमिका

रासायनिक लेपन जैसी धर्मशास्त्र-विरुद्ध कृति के लिए मंदिर समिति तथा पुरातत्व विभाग का निरंतर प्रयास क्यों ?