ऐ हिन्दू तुझे अब जगना ही होगा ।

श्री. सागर निंबाळकर

है बीत गई कई रातें सोकर ऐ हिन्दू तुझे अब जगना ही होगा ।
देव-देश-धर्म की रक्षा हेतु सनातन राष्ट्र तुझे लाना ही होगा ।। १ ।।

अब छोड निराशा की शंकाएं आरंभ प्रचंड करना ही होगा ।
तोड बेडियां संदेहों की सनातन राष्ट्र अपनाना ही होगा ।। २ ।।

क्षात्रतेज की कर तू उपासना, ब्राह्मतेज भी बढाना ही होगा ।
स्वभावदोषों पर विजय पाकर हृदय सनातन करना ही होगा ।। ३ ।।

साथ लेकर हिन्दुओं को धर्ममार्ग पर चलना होगा ।
उज्ज्वल भविष्य पाने हेतु संघर्ष तुझे करना ही होगा ।। ४ ।।

त्यागकर व्यष्टि (टीप १) चिंताएं समष्टि कार्य में बढना ही होगा ।
जात-पात के बंधन तोड धर्म के लिए लडना ही होगा ।। ५ ।।

छोड पिंजरा विधर्मीवाद का धर्मपालन करना ही होगा ।
धर्मनिष्ठ राज्यकर्ताओं को अब सत्ता पर बिठाना ही होगा ।। ६ ।।

है वक्त गया चर्चा का अब क्रांतिकार्य मे जुडना ही होगा ।
संवैधानिक सनातन राष्ट्र का आग्रह अब करना ही होगा ।। ७ ।।

अब ना रुकना है ना थकना है भारत को विश्वगुरु बनाना ही होगा ।
गुरुदेव (टीप २) की कृपा प्राप्त कर मोक्षद्वार तक जाना ही होगा ।। ८ ।।

ऐ हिन्दू तुझे अब जगना ही होगा ।।

टीप १ : व्यक्तिगत
टीप २ : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

– श्री. सागर निंबाळकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१७.३.२०२५)