‘खालिस्तान के हमारे लक्ष्य को वर्जित रुप में न देखें !’ – खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह
खालिस्तानवादी अब खुले रूप से उनके बंटवारे के लक्ष्य को जनसमर्थन पाने का प्रयास कर रहे हैं, यही इससे स्पष्ट होता है ! क्या सरकार अब खालिस्तानी आंदोलन को कुचलेगी ?
खालिस्तानवादी अब खुले रूप से उनके बंटवारे के लक्ष्य को जनसमर्थन पाने का प्रयास कर रहे हैं, यही इससे स्पष्ट होता है ! क्या सरकार अब खालिस्तानी आंदोलन को कुचलेगी ?
मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणाम ! इससे ‘सरकारी विश्वस्तों की केवल मंदिर के पैसों पर ही नहीं, अपितु श्रद्धालुओं के पैसों पर भी दृष्टि गढी होती है’, ऐसा किसी को लगे तो इसमें गलत क्या है ?
वैसे तो देवता के भक्तों को ही मंदिर का न्यासी होने का अधिकार दिया जाना चाहिए । अब हिन्दुओं को सरकार और न्यायालय के समक्ष यह मांग मजबूती से करना आवश्यक !
व्यक्तिगत छायाचित्र सामाजिक माध्यम से प्रसारित किए जाने का प्रकरण
भारत के चुनावों में रुकावट लाने हेतु पश्चिमी राष्ट्रों ने अभी से कमर कसना आरंभ कर दिया है’, डॉ. जयशंकर ने इस वक्तव्य के माध्यम से ऐसा कहा है, यह ध्यान में लें !
कांग्रेस सत्ताकाल में बोर्ड को अवैध मार्ग से यह संपत्ति सौंपी गई थी !
भाजपा नेता डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने जनहित याचिका द्वारा रामसेतु को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने हेतु केंद्र शासन को निर्देश दिए जाने की मांग की थी । सर्वोच्च न्यायालय ने इसकी सुनवाई सूची में सम्मिलित करना स्वीकार किया है ।
ऐसी घटना प्रशासन के लिए लज्जास्पद ! जो काम प्रशासन को करना चाहिए, यह करने के लिए हिन्दू संगठनों को कानून हाथ में लेकर आगे क्यों आना पडता है ? उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के रहते यह अपेक्षित नहीं !
जब कोई सरकारी प्रतिष्ठान पर हिन्दू देवताओं के प्रति आदर भाव से कार्य करता है, तभी दिखावटी धर्मनिरपेक्षता’ का स्मरण करने वालों को, उस समय धर्मनिरपेक्षता का स्मरण नहीं होता जब सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया जाता है तथा मस्जिदें बनवाई जाती हैं ?