Dr. Anand Ranganathan : ‘अनशन का अर्थ है अराजकता’, यह डॉ. आंबेडकर का वक्तव्य सोनम वांगचूक को करारा तमाचा !

देहली में चल रहे कथित छात्र आंदोलन के प्रकरण लेखक डॉ. आनंद रंगनाथन् ने की देहली में चल रहे कथित छात्र आंदोलन की कडी आलोचना

नई देहली – कॉकरोच जनता दल के आंदोलन का प्रकरण तीन अथवा चार सूत्रों का मिश्रण हैं । जंतरमंतर का आंदोलन, साथ ही सोनम वांगचूक के अनशन के संदर्भ में जिस संविधान का हवाला देकर जिन विचारों का डंका बजाया जा रहा है, उन डॉ. बाबासाहब आंबेडकरों के विचारों को समझ लेना होगा । उन्होंने कहा था, ‘‘यदि हमें लोकतंत्र को केवल नाम से नहीं, अपितु वास्तव में टिकाना है, तो हमें क्या करना होगा ? मेरे अनुसार पहली बात हमें यह करनी चाहिए कि सामाजिक एवं आर्थिक लक्ष्यों को साध्य करने हेतु संवैधानिकप पद्धतियों को पकडे रखना ! इसका अर्थ हमें क्रांति के हिंसक मार्ग छोड देने चाहिएं । इसका अर्थ यह है कि हमें सविनय कानूनभंग, असहकारिता एवं सत्याग्रह का मार्ग छोड देना चाहिए । यह और कुछ (अनशन का मार्ग) नहीं है, अपितु अराजकता का व्याकरण है तथा उसे हम जितना शीघ्र छोड देंगे, उतना हमारे लिए अच्छा रहेगा’, ऐसा महत्त्वपूर्ण वक्तव्य प्रसिद्ध लेखक एवं वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन् ने किया । वे एक समाचारवाहिनी पर ‘कॉकरोच जनता दल’ की ओर से चर रहे आंदोलन एवं संबंधित गतिविधियों पर बोल रहे थे ।

डॉ. रंगनाथन् ने आगे कहा कि २५ नवं९बर १९४९ की संविधान सभा में दिए गए ऐतिहासिक भाषण में डॉ. आंबेडकर ने आगे यह भी कहा था कि अनशन एक प्रकार से नैतिक ‘ब्लैकमेल’ एवं दबाव होता है । वे विरोधियों को असंभवसी स्थिति में डाल देते हैं अर्थात ‘एक तो पीछे हटिए अथवा किसी की मृत्यु का दायित्व स्वीकार करें’ स्वतंत्र भारत में ऐसे मार्ग संसद, विधानमंडल, चुनाव एवं न्यायव्यवस्था को बाजू में छोड देते हैं । कल यदि प्रत्येक समूह ने अपनी मांगों के लिए अनशन अथवा सत्याग्रह का मार्ग अपनाया, तो उससे लोकतंत्र बस नाम के लिए शेष रह जाएगा तथा उससे अराजकता उत्पन्न होगी । लोकतांत्रिक संस्थाएं दुर्बल होकर तानाशाही का संकट खडा हो जाएगा । भारत को आंदोलनों के लोकप्रिय अथवा भावनिक पद्धतियों की अपेक्षा संवैधानिक नैतिकता, संविधानत तथा उसकी प्रक्रिया के प्रति सम्मान की आवश्यकता है । उसके स्थान पर राजनीतिक एवं संवैधानिक पद्धतियों को अपनाना चाहिए, शिक्षा देनी चाहिए तथा आंदोलन एवं संगठन बनाना चाहिए ।

डॉ. रंगनाथन् द्वारा रखे गए महत्त्वपूर्ण सूत्र

१. कोई भी नेता परिपूर्ण नहीं है, तो आप कितने लोगों का त्यागपत्र मांगेंगे ?

केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र मांगा जा रहा है । वास्तव में मैं आपको एक सूची दे सकता हूं । इस देश में ५४३ सांसद हैं, केंद्र में ७० कैबिनेट मंत्री हैंत था राज्यों में कितने हैं, यह ज्ञात नहीं है । इनमें से हर व्यक्ति परिपूर्ण होने से बहुत दूर है । मैं तो यह कहूंगा कि राजनेता होने के कारण हर कोई किसी न किसी प्रकार से समझौता करता है । जो काम उन्हें करना चाहिए, वह वे नहीं करते; इसलिए आप उनका त्यागपत्र मांगने लगे, तो यह सूची इतनी लंबी है कि आप उसे रोक नहीं पाएंगे ।

२. पेपल लीक के प्रकरण में केंद्र सरकार को दायित्व लेना चाहिए था !

नीट का पेपर लीक होने के दिन ही सरकार को उसका दायित्व लेना चाहिए था । उसका उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए था । इतना ही नहीं, अपितु सरकार को गरीब छात्रों को ५ से १० सहस्र रुपए क्षतिपूर्ति देनी चाहिए थी । यह मैंने उसी समय कहा था । पेपर लीक हुआ, उससे २३ लाख छात्र प्रभावित हुए तथा अनेक गरीब छात्रों ने आत्महत्या की । उसका दायित्व किसका है ? शिक्षामंत्री के त्यागपत्र की मांग उचित है ।

३. आंदोलनकारी सर्वोच्च न्यायालय की निष्क्रियता की निंदा क्यों नहीं करते ?

आंदोलनकारी अनुचित पद्धति से संवैधानिक संस्था का (सरकार का) विरोध कर रहे हैं । उन्हें सर्वोच्च न्यायालयाच्या निष्क्रियता की निंदा करनी चाहिए । केवल सर्वोच्च न्यायालय ही सरकार को प्रत्येक छात्र को क्षतिपूर्ति देने का, उत्तरदायी लोगों को अपदस्थ करने का तथा अच्छी व्यवस्था बनाने का आदेश दे सकता है ।

४. सरकार के लिए यह लज्जाप्रद !

पेपर लीक होने के दिन मैंने कहा था कि ‘नीट’ परीक्षा के लिए पहले ही २३ लाख प्रश्नपत्रिकाएं छापकर रखने का कोई अर्थ नहीं है; क्योंकि उससे पेपर लीक होने की संभावना बढती है । आप अब कह रहे हैं कि अगले वर्ष से आप इसे डिजिटल करेंगे, तो क्या पहले आप सोए हुए थे ? १५ लाख छात्र ‘जेईई मेंस’ (‘जॉईंट एन्ट्रेंस एक्जाम मेंस’ अर्थात् अभियांत्रिकी प्रवेश हेतु) परीक्षा देते हैं । वह छापे हुए प्रश्नपत्रिका के द्वारा नहीं होती, अपितु वह संगणकीकृत होती है । जब १५ लाख लोग उसे कर सकते हैं, तो २० लाख लोग भी कर सकते हैं । प्रधानमंत्री द्वारा ‘अभिनंदन ! आपने पुनः ‘नीट’ परीक्षा का आयोजन करना’, ऐसा कहना दुर्भाग्यजनक है । ऐसा होना ही लज्जाप्रद बात थी, इसे हम ध्यान में क्यों नहीं लेते ?

५. अभिजीत दीपके अरविंद केजरीवाल की, जबकि सोनम वांगचूक अण्णा हजारे की भूमिका निभा रहे हैं !

वर्ष २०११ में जिसप्रकार से अरविंद केजरीवाल एंव अण्णा हजारे ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन खडा किया था, उसप्रकार का आंदोलन आज खडा किया गया है । ‘कॉकरोच जनता दल’ के प्रमुख अभिजीत दीपके अरविंद केजरीवाल की तथा अनशन पर बैठे सोनम वांगचूक अण्णा हजारे की भूमिका निभा रहे हैं ।

संपादकीय भूमिका

जिस संविधानकार डॉ. आंबेडकर के नाम का महिमामंडन कर इस आंदोलन के द्वारा संविधान का हवाला दिया जा रहा है, उसी डॉ. आंबेडकर ने स्वयं ही ‘अनशन का हथियार स्वतंत्र भारत में आवश्यक नहीं है’, यह स्पष्ट करते हुए उसे ‘अराजकता का व्याकरण’ कहा था । डॉ. रंगनाथन् द्वारा कराया गया यह स्मरण स्वयं को डॉ. आंबेडकर के अनुयायी माननेवालों का छद्म आंबेडकर प्रेम दिखाता है, ऐसा ही अब कहना चाहिए !