हमारे पास लाठीमार के लघु चलचित्र देखने का समय नहीं है !

जंतरमंतर पर हिंसक प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीमार के विरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं से कहा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

नई दिल्ली – “हमारा एवं अपना समय नष्ट मत कीजिए । हमें लाठीमार के लघु चलचित्र में कोई रुचि नहीं है । हमारे पास ये लघु चलचित्र देखने का समय कदापि भी नहीं है ।” ऐसे शब्दों में सर्वोच्च न्यायालय ने जंतरमंतर पर हिंसा करने वाले (कॉकरोच जनता पार्टी के) कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीमार के विरोध में प्रविष्ट याचिका की सुनवाई के समय याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से कहा ।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में अपने तर्क में कहा कि छात्र (नीट—नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अर्थात राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा), ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ में सुधार एवं प्रश्न-पत्र सार्वजनिक होने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सार्वजनिक हित के प्रकरणों पर प्रदर्शन कर रहे हैं । इस पर सुनवाई के समय प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मध्य में बोलकर कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद !” तदोपरांत अधिवक्ताओं ने न्यायालय को सूचित किया कि पुलिस के दुराचार एवं लाठीमार के लघु चलचित्र उपलब्ध हैं; जिस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि लघु चलचित्र देखने का समय नहीं है ।

इससे पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी पुलिस कार्रवाइयों के विरुद्ध इसी आशय की एक याचिका पर तात्कालिक सुनवाई करने को अस्वीकार किया था । उच्च न्यायालय ने कहा था, “न्यायालय में इन सभी प्रकरणों को व्यर्थ में खींचे नहीं ।”

संपादकीय भूमिका

लाठीमार के विरोध में न्यायालय जाने वाले लोग जिन पर लाठीमार हुआ है उनके द्वारा किए गए हिंसा के संबंध में क्यों नहीं बोल रहे ? सार्वजनिक संपत्ति को हुई हानि की अनुप्राप्ति के संबंध में वे क्यों नहीं बोल रहे ?