जंतरमंतर पर हिंसक प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीमार के विरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं से कहा

नई दिल्ली – “हमारा एवं अपना समय नष्ट मत कीजिए । हमें लाठीमार के लघु चलचित्र में कोई रुचि नहीं है । हमारे पास ये लघु चलचित्र देखने का समय कदापि भी नहीं है ।” ऐसे शब्दों में सर्वोच्च न्यायालय ने जंतरमंतर पर हिंसा करने वाले (कॉकरोच जनता पार्टी के) कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीमार के विरोध में प्रविष्ट याचिका की सुनवाई के समय याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से कहा ।
After the Delhi High Court refused an urgent hearing on the plea against police action during the CJP protest, the Supreme Court has now also declined an urgent hearing.
CJI Surya Kant remarked, "We don't have time to watch videos."
Yet, petitions are filed against police… https://t.co/PsgQ36KieL pic.twitter.com/h40hOes5Kv
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 22, 2026
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में अपने तर्क में कहा कि छात्र (नीट—नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अर्थात राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा), ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ में सुधार एवं प्रश्न-पत्र सार्वजनिक होने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सार्वजनिक हित के प्रकरणों पर प्रदर्शन कर रहे हैं । इस पर सुनवाई के समय प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मध्य में बोलकर कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद !” तदोपरांत अधिवक्ताओं ने न्यायालय को सूचित किया कि पुलिस के दुराचार एवं लाठीमार के लघु चलचित्र उपलब्ध हैं; जिस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि लघु चलचित्र देखने का समय नहीं है ।
इससे पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी पुलिस कार्रवाइयों के विरुद्ध इसी आशय की एक याचिका पर तात्कालिक सुनवाई करने को अस्वीकार किया था । उच्च न्यायालय ने कहा था, “न्यायालय में इन सभी प्रकरणों को व्यर्थ में खींचे नहीं ।”
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