श्री राम मन्दिर में दान की चोरी होना समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा – न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – श्री राम मन्दिर में दान की चोरी होना भारतीय समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है । सरकार को कानून में संशोधन करना चाहिए, जिससे भ्रष्टाचार के आरोपियों को फांसी का दंड दिया जा सके, ऐसा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अतुल श्री धरन ने कहा है । बुलडोजर द्वारा की गई कार्यवाही से सम्बन्धित एक प्रकरण की सुनवाई के समय न्यायमूर्ति श्री धरन ने यह टिप्पणी की । उनके साथ खण्डपीठ में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नन्दन भी उपस्थित थे ।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने आगे कहा कि,

१. यदि श्री राम मन्दिर के दान की चोरी से भी किसी पर कोई प्रभाव नहीं पडता, तो उसे किसी भी बात की लज्जा नहीं हो सकती ।

२. सामान्य भारतीय को भ्रष्टाचार अब ‘सामान्य’ लगने लगा है । भ्रष्टाचार के प्रकरण में जब तक किसी को बन्दी नही बनाया जाता, तब तक सामान्य व्यक्ति सम्बन्धित व्यक्ति को दोषी नहीं मानता । पारदर्शिता सूचकांक में भारत विश्व के १८२ देशों में ९१वें स्थान पर है । फिर भी हमें लज्जा नहीं आती ।

दान चोरी के प्रकरण में विशेष अन्वेषण दल के गठन का सर्वोच्च न्यायालय का आदेश

श्री राम मन्दिर में दान की चोरी के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने २० जुलाई को पुनः विशेष अन्वेषण दल के गठन का आदेश दिया है । मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त ने कहा, ‘‘नये सिरे से विशेष अन्वेषण दल का गठन किया जाए । दल का नेतृत्व वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी करें । ऐसा करने से अन्वेषण निर्णायक चरण तक पहुंचेगा ।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम केवल सावधान करना चाहते हैं । इस प्रकरण का राजनीतिकरण न करें । प्रथम दृष्टया यह कृत्य कानून के अन्तर्गत एक आपराधिक प्रकरण प्रतीत होता है । इसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र तथा पूर्ण ईमानदारी से जांच होनी चाहिए । अन्वेषण अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे । हमारा केवल इतना ही कहना है ।”