Taslima Nasreen : जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से बांग्लादेश के हिंसक आंदोलन की याद आ गई ! — तस्लीमा नसरीन

नई दिल्ली — जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए उन ‘कॉकरोचों’ को देखकर मुझे बांग्लादेश में जुलाई २०२४ के आंदोलन की याद आ गई । छात्रों ने “कोटा (आरक्षण) की योग्यता ? योग्यता, योग्यता” जैसे नारों के साथ आंदोलन आरंभ किया था । अंततः उन्होंने सरकार को हटाने की मांग की । इसके पश्चात जो कुछ हुआ, उसकी कीमत आज पूरा बांग्लादेश चुका रहा है । वहां कट्टरपंथी जिहादियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है । क्रूरता, सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता, स्त्री-विरोध, आतंकवाद तथा अराजकता के कारण देश विनाश की ओर बढ रहा है । यह बात बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ‘एक्स’ पर लिखी है ।

प्रत्येक छात्र आंदोलन लोकतंत्र का समर्थन करता हो, यह आवश्यक नहीं !

तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा कि जुलाई २०२४ के उस आंदोलन के पश्चात जब भी मैं कहीं छात्रों की भीड को एकत्रित होते देखती हूं, तो मुझे असहजता तथा भय का अनुभव होता है । अब ऐसे जनसमूहों पर सहज रूप से विश्वास नहीं हो पाता । जुलाई २०२४ की घटनाओं ने मुझे यह सिखाया है कि प्रत्येक छात्र आंदोलन लोकतंत्र का पक्षधर हो, यह आवश्यक नहीं; सरकार-विरोधी प्रत्येक आंदोलन स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करे, यह भी आवश्यक नहीं; तथा प्रत्येक क्रांति वास्तव में क्रांति ही हो, यह भी निश्चित नहीं । कुछ क्रांतियां पुरानी सत्ता को तो उखाड फेंकती हैं, किंतु उनके परिणाम स्वरूप उससे भी अधिक भयावह अंधकार फैल जाता है । तस्लीमा नसरीन ने ऐसी आशंका व्यक्त की है ।