झांसी (उत्तरप्रदेश) के दानिश खान द्वारा एक लडकी पर आक्रमण !
अल्पसंख्यक हैं, परंतु अपराध के क्षेत्र में बहुसंख्यक !
अल्पसंख्यक हैं, परंतु अपराध के क्षेत्र में बहुसंख्यक !
गढवा (झारखंड) के एक विद्यालय में ७५ प्रतिशत मुसलमान विद्यार्थी हैं । इसलिए पाठशाला में इस्लामी नियम लागू करने के लिए मुसलमानों ने प्रधानाध्यापक पर दबाव डाला, तथा विद्यार्थियों को हाथ जोडकर प्रार्थना करने से रोका । क्या ‘जमियत-उलेमा-ए-हिन्द’ ने कभी इसके विरुद्ध याचिका प्रविष्ट की है ?
इमरान खान नाम के एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू लड़की को स्वयं ‘सुरेंद्र सिंह’ बताकर प्रेम के जाल में फंसाया । उसका धर्म परिवर्तन कर उससे विवाह किया ।
ऐसे प्रकरणों में उत्तर प्रदेश पुलिस का निष्क्रिय होना अत्यंत लज्जास्पद है ! सरकार ऐसी गंभीर घटनाओं के प्रति असंवेदनशील पुलिस अधिकारियों को सेवामुक्त क्यों नहीं करती ?
हिन्दुओं को जड से उखाड फेंकने की मानसिकता रखनेवाले इस जिहादी आतंकवाद को नष्ट करने के लिए अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ ही एकमात्र विकल्प रह गया है, यह समझ लें !
‘हिन्दू संगठित हो जाएं तो वो क्या नहीं कर सकते ?, यह इसका उदाहरण है ! यदि कोई कहे, ‘इस प्रकार से हिन्दुओं पर आक्रमण करने वालों को सबक सिखाना आवश्यक है’, तो क्या गलत है ?
यदि ऐसा है, तो पूरे देश में जहां अधिकांश छात्र हिन्दू हैं, गुरुवार को अवकाश घोषित करें ! रविवार का साप्ताहिक अवकाश भारत में ईसाई अंग्रेज़ों द्वारा लाई गई परंपरा है !
बांग्लादेश में ऐसा कुछ होने से पूर्व ही भारत सरकार को वहां स्थित शेख हसीना सरकार को जबाब उत्तर पूछना चाहिए ! यदि भारत सरकार निष्क्रिय रहती है और कोई आरोप लगाए कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार के लिए एक प्रकार से भारत सरकार ही उत्तरदायी है, तो इसमें भूल कैसी ?
ऐसे विघातक प्रशिक्षण केंद्र का पता न लगना पुलिस के लिए अत्यंत लज्जास्पद है ! ‘पुलिस को इस बात का पता नहीं लगा या उसने अनदेखा किया ? , इस बिंदु का भी अन्वेषण होना चाहिए एवं वास्तविकता उजागर होनी चाहिए !
जिहादी संगठन के लिए भारत में इस प्रकार धन इकट्ठा किया जाता है । तब सुरक्षातंत्र को इसके विषय में कुछ भी ज्ञात न होना, लज्जाजनक ! आतंकवादी संगठन के लिए पैसे मांगनेवाले और उसके लिए पैसे देनेवाले, ऐसे सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक !