१२ से १८ जून की अवधि में गोवा में होनेवाले दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ के उपलक्ष्य में …

इस्लामी अथवा ईसाई देशों की भांति हिन्दू राष्ट्र कोई संकीर्ण अवधारणा (संकल्पना) नहीं है, अपितु वह विश्वकल्याण का विचार करनेवाली, प्रत्येक नागरिक की लौकिक एवं पारलौकिक उन्नति का विचार करनेवाली एक सत्त्वप्रधान व्यवस्था है ।

राष्ट्रीय स्तर पर धर्मपरिवर्तन रोकने के लिए कानून सहित संविधान में सुधार की आवश्यकता ! – श्री. एम्. नागेश्वर राव, भूतपूर्व प्रभारी महासंचालक, केंद्रीय अपराध अन्वेषण यंत्रणा

आज देश में प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन कर, उन्हें ईसाई अथवा मुसलमान बनाया जा रहा है । अनेक राज्यों में भले ही धर्मपरिवर्तन विरोधी कानून हो, तब भी प्रतिदिन भारी मात्रा में हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन कर भारत को तोडने का षड्यंत्र हो रहा है ।

क्या है हिन्दू राष्ट्र संसद ?

जिस प्रकार जनहित और राष्ट्रहित से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा करने के लिए जनप्रतिनिधियों की संसद का अस्तित्व है, उसी प्रकार से धर्महित के विषय पर चर्चा करने के लिए धर्मप्रतिनिधियों की यह हिन्दू राष्ट्र संसद है । इस संसद में पारित होनेवाले प्रस्ताव जनप्रतिनिधियों को भेजे जाएंगे ।

हिन्दूविरोधी घटनाओं का उत्तर देने के लिए हिन्दुओं को ‘कट्टर हिन्दू’ बनना पडेगा ! – डॉ. (सुश्री) वैदेही ताम्हण, संपादिका, ‘आफ्टरनून वॉयस’, मुंबई

दशम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन में हिंन्दूओं के सुरक्षा विषय पर विचारमंथन !    रामनाथी (गोवा), १४ जून (संवाददाता) – मैं हिन्दू हूं, इस पर मुझे गर्व है । आज के समय में विरोधियों द्वारा हिन्दुओं की संस्कृति पर वैचारिक और शैक्षणिक स्तरों पर आक्रमण किए जा रहे हैं । राष्ट्रवादी कांग्रेस के … Read more

हिन्दुत्वनिष्ठों की ओर से हिन्दू जनजागृति समिति और सनातन संस्था के कार्य का गौरव !

‘ऑल इंडिया लीगल एड फोरम’ तथा ‘अखिल भारतीय बार एसोसिएशन’ के महासचिव अधिवक्ता जॉयदीप मुखर्जी की ओर से हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक एवं सनातन संस्था की प्रवक्ता को सम्मानित किया गया ।

धर्मांतरण कराते समय ईसाई हिन्दुओं में राष्ट्रविरोधी भावना उत्पन्न करते हैं ! – श्रीमती एस्थर धनराज, सह निदेशिका, भगवद्गीता फाऊंडेशन फॉर वैदिक स्टडीज, भाग्यनगर, तेलंगाणा

ईसाई जब हिन्दुओं का धर्मांतरण करते हैं, तब वे उनमें राष्ट्रविरोधी भावना उत्पन्न करते हैं । उनकी यह नीति केवल भारततक सीमित नहीं है, अपितु ईसाई जिस देश में जाते हैं, वहां वे यही नीति अपनाते हैं ।

विकास के नाम पर तीर्थस्थलों को पर्यटनस्थल मत बनाइए !

प्राचीन काल में अंकोर वाट, हम्पी, आदि भव्य मंदिरों का निर्माण करनेवाले राजा-महाराजाओं ने उनका उत्तम व्यवस्थापन किया था । इन मंदिरों के माध्यम से गोशालाओं, अन्नछत्रों, धर्मशालाओं, शिक्षाकेंद्रों आदि चलाकर समाज की अमूल्य सहायता की जाती थी ।

गोवा के चर्च द्वारा हडप लिए गए मंदिरों की पुनर्स्थापना के लिए हिन्दुओं को एकत्रित होकर लडाई लडनी पडेगी ! – प्रा. सुभाष वेलिंगकर, राज्य संघचालक, भारत माता की जय संघ, गोवा

पोर्तुगीज सरकार के कार्यकाल में गोवा के छोटे-बडे २ १ सहस्र से अधिक मंदिर ध्वस्त किए गए । उनमें केवल वरेण्यपुरी (वेरणा) और श्री विजयादुर्गादेवी (शंखवाळी) ये २ मंदिर ही चर्च के आक्रमण से बच सके । अब इन मंदिरों को राज्य पुरातत्व विभाग के अंतर्गत संरक्षित वास्तुओं के रूप में घोषित किए गए हैं; परंतु ऐसा होते हुए भी विगत अनेक वर्षाें से चर्च के माध्यम से इस मंदिर की भूमि हडपने का षड्यंत्र चल रहा है ।

गोवा के विध्वंसित मंदिरों के विषय में न्यायालयीन लडाई लडने के लिए प्रमाण देने का आवाहन

राष्ट्रीयस्तर पर मुघलों, पोर्तुगीजों आदि आक्रांताओं ने केवल श्रीराममंदिर, काशी, मथुरा, कुतुबमिनार, ताजमहल और भोजशाला ही नहीं, अपितु सहस्रों अन्य मंदिर भी गिराए हैैं । भारत को स्वाधीनता मिली; परंतु हिन्दुओं के प्राचीन धार्मिक स्थल उसी प्रकार से विदेशी गुलामी में रह गए

धर्मकार्य में पैर जमाकर खडे रहना आवश्यक – अधिवक्ता भारत शर्मा, संरक्षक, धरोहर बचाओ समिति, राजस्थान

सनातन धर्म वैज्ञानिक कैसा है, यह समाज के सामने लाने के लिए हमने ‘अखिल भारतीय विज्ञान दल’की स्थापना की । इस माध्यम से हमने अनेक लोगों को सनातन धर्म के अध्ययन के लिए प्रवृत्त किया । जन्मदिवस के दिन केक न काटकर औक्षण करना, यज्ञ संस्कृति का पालन करना आदि छोटे-छोटे कृत्यों से हम समाज में सनातन धर्म की पुनः स्थापना करेंगे ।