सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘सुख पाने से जुडी सभी बातें सिखानेवाले माता-पिता और सरकार बच्चों को कुछ भी अच्छा एवं सात्त्विक नहीं सिखाते । इस कारण देश दुर्दशा की उच्चतम सीमा तक पहुंच गया है । इसका एक ही उपाय है और वह है हिन्दू राष्ट्र की स्थापना !’

आइए, अनुभव करें महाकुंभ क्षेत्र की हिन्दू राष्ट्रप्रीत्यर्थ संपन्न दिव्य पदयात्रा !

मोक्षनगरी में हुए हिन्दू राष्ट्र के जयघोष से । गूंज उठी पृथ्वी, आकाश एवं स्वर्ग ।।

Prayagraj Kumbh Parva 2025 : कुंभ क्षेत्र पदयात्रा में गूंजी हिन्दू राष्ट्र की हुंकार !

२२ जनवरी २०२५ को अयोध्या में श्री रामलला की स्थापना समारोह के एक वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर, हिन्दू राष्ट्र की मांग को लेकर यहां ‘हिन्दू राष्ट्र पदयात्रा’ का आयोजन किया गया । इसके माध्यम से हिन्दू राष्ट्र की गर्जना पूरे कुंभ क्षेत्र में गूंज उठी ।

Prayagraj Kumbh Parva 2025 – HINDU RASHTRA ADHIVESHAN : महाकुंभपर्व में साधु-संतों का धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का निश्चय !

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभपर्व के आरंभ से ही अनेक अनेक संत-महंतों तथा महामंडलेश्वरों में हिन्दू राष्ट्र का उद्घोष किया है । अब उसके आगे कदम बढाकर हिन्दू राष्ट्र की इस संकल्पना को साकार करने के लिए अनेक संत-महंत तथा महामंडलेश्वर इस अधिवेशन में एकत्रित हुए ।

Shankaracharya Nischalanand Sarasvati : भगवान और ऋषि-मुनि के संकेत पर मैं हिन्दू राष्ट्र का उद्घोष करता हूं ! – जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी, पुरी मठ

पिछले तीन साल से कह रहा हूं कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना चाहिए।’ पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि मैं भगवान और ऋषिमुनि से जो संदेश प्राप्त करता हूं,उसे प्रसारित कर रहा हूं।

संपादकीय : हिन्दुओं का दुर्भाग्य !

हिन्दुओं का महाकुम्भ पर्व ‘अर्थ’ एवं ‘काम’ का ग्लैमर नहीं; अपितु ‘धर्म’ एवं ‘मोक्ष’ की अनिवार्यता दर्शानेवाला तीर्थस्थल है !

‘कॉग्निटिव वॉरफेयर’ का उपयोग कर ताइवान का चीन में विलय !

‘कॉग्निटिव वॉरफेयर !’ वर्तमान के युद्ध क्षेत्र में हथियारों की अपेक्षा मन पर आक्रमण करनेवाले हथियार अधिक प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं । इस युद्ध में जानकारी, विचारों एवं भावनाओं का उपयोग कर समाज के लोगों के विश्वास, निर्णय तथा कृतियों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है ।

मनुष्य भगवान बनने हेतु सनातन की प्रदर्शनी देखे ! – स्वामी शारदानंद, उपसचिव, रामकृष्ण आश्रम, कोलकाता

सनातन की ग्रंथ-प्रदर्शनी में इसका संपूर्ण ज्ञान उपलब्ध है, यह देखकर मैैं आनंदित हूं । सनातन संस्था का यह कार्य प्रशंसनीय है ।

सद्गुरुद्वयी द्वारा अक्षयवट के दर्शन का भावविभोर बनानेवाला क्षण !

‘पृथ्वी के प्रलय के समय भगवान श्रीविष्णु इसी अक्षयवट के पत्ते पर शिशु रूप में आकर वास करते हैं ।’, ऐसी मान्यता है ।

सनातन की ग्रंथ-प्रदर्शनी स्थल पर सद्गुरुद्वयी के दर्शन कर आनंदित हुए साधक !

कुम्भ क्षेत्र में अध्यात्म का प्रसार हो, हिन्दुओं को धर्मशिक्षा मिले तथा हिन्दुओं में हिन्दू राष्ट्र के विषय में जागृति हो, इन उद्देश्यों से ‘सनातन संस्था वाराणसी’ एवं ‘सनातन संस्था गोवा’, इन संस्थाओं की ओर से भव्य ग्रंथ एवं फलक प्रदर्शनी लगाई गई है । सद्गुरुद्वयी ने २२ जनवरी को इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया ।