देश इसी कारण दुर्दशा की उच्चतम सीमा तक पहुंच गया है !

‘सुख पाने से जुडी सभी बातें सिखानेवाले माता-पिता और सरकार बच्चों को कुछ भी अच्छा एवं सात्त्विक नहीं सिखाते । इस कारण देश दुर्दशा की उच्चतम सीमा तक पहुंच गया है । इसका एक ही उपाय है और वह है हिन्दू राष्ट्र की स्थापना !’
साधना की अद्वितीयता !
‘जिस प्रकार कीटाणु आंखों से दिखाई नहीं देते, परंतु वे सूक्ष्मदर्शी यंत्र से दिखाई देते हैं; उसी प्रकार सूक्ष्मदर्शी यंत्र से जो दिखाई नहीं देता, ऐसा सूक्ष्मातिसूक्ष्म जगत साधना से ज्ञात होता है !’
कलियुग में माता-पिता ऐसे भी होते हैं !
‘स्वयं भ्रष्टाचार कर अपने बच्चों के सामने भ्रष्टाचार करने का आदर्श रखनेवाले कलियुग के माता-पिता !’
परिवार के सदस्यों के भ्रष्टाचार को उजागर करना राष्ट्रीय कर्तव्य है !
‘युवाओ, यदि आपके माता-पिता भ्रष्टाचार और पाप कर रहे हैं, तो अपनी देशभक्ति बढाएं और उनके भ्रष्टाचार को उजागर करें, ताकि वे आगे और अधिक पाप करने से दूर रहें ! पत्नी का भी राष्ट्र के प्रति यह कर्तव्य है कि वह अपने पति के भ्रष्टाचार, अनैतिक आचरण आदि को उजागर करे ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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