श्राद्ध का उद्देश्य एवं श्राद्ध के विविध प्रकार
सर्व जीवों की लिंगदेह साधना नहीं करती । अतः श्राद्धादि विधि कर, उन्हें बाह्य ऊर्जा के बल पर आगे बढाना पडता है; इसलिए श्राद्ध करना महत्त्वपूर्ण है ।
सर्व जीवों की लिंगदेह साधना नहीं करती । अतः श्राद्धादि विधि कर, उन्हें बाह्य ऊर्जा के बल पर आगे बढाना पडता है; इसलिए श्राद्ध करना महत्त्वपूर्ण है ।
इसका लाभ ९०० बच्चों और २८ शिक्षकों ने लिया । इस अवसर पर क्रांतिकारियों की और धर्मशिक्षा प्रदान करनेवाले फ्लेक्स की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका लाभ पाठशाला के विद्यार्थियों व शिक्षकों ने लिया ।
नागपंचमी के दिन हलदी से अथवा रक्तचंदन से एक पीढे पर नवनागों की आकृतियां बनाते हैं एवं उनकी पूजा कर दूध एवं खीलों का नैवेद्य चढाते हैं । नवनाग
पवित्रकों के नौ प्रमुख समूह हैं ।
श्रावण पूर्णिमा अर्थात इस वर्ष ३० अगस्त को रक्षाबंधन है । रक्षाबंधन त्योहार के दिन बहन अपने भाई की आरती कर प्रेम के प्रतीक के रूप में उसे राखी बांधती है । भाई अपनी बहन को भेंटवस्तु देकर उसे आशीर्वाद देता है ।
कुछ अभिभावक, सामाजिक तथा राष्ट्र-धर्म हितैषी संगठन बच्चों में जागृति लाने का प्रयास कर उन्हें अपने शौक संजोने अथवा पुस्तकें पढने का सुझाव देते हैं; परंतु उन्हें निश्चित दिशा नहीं मिलती । इसलिए प्रस्तुत लेख में कुछ उदाहरणों के माध्यम से इस विषय को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है ।
“सहस्रों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने संस्कृत भाषा में ही अनेक अविष्कार लिखकर रखे हैं । ऐसी सर्वार्थ से आदर्श देववाणी संस्कृत को व्यावहारिक भाषा बनाने के लिए हमें प्रयास करने चाहिएं; इसलिए प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों को बचपन से अंग्रेजी नहीं, अपितु संस्कृत भाषा की शिक्षा देना आवश्यक है ।”, ऐसा मत उन्होने व्यक्त किया.
बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री ने किया हिन्दुओं को धर्मशिक्षा देने का आवाहन !
हमें स्वयं धर्मशिक्षा लेनी होगी और समाज को देनी होगी । यह एक प्रकार से धर्म की स्थापना का अर्थात पुरुषार्थ का कार्य है । ऐसा प्रतिपादन दिल्ली से उज्जैन यात्रा पर आए सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने किया । वे यहां के वेदनगर स्थित आनंद भवन में आयोजित हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे ।
हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान के अंतर्गत हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने स्वस्तिक पीठाधीश्वर डॉ. अवधेश पुरी महाराजजी की भेंट लेकर उनसे हिन्दू राष्ट्र के विषय में संवाद किया
बच्चों को धर्माचरण करने का आग्रह रखना ही चाहिए । धर्माचरण के कारण हिन्दू युवती अथवा महिला को ऐसे प्रतिकूल प्रसंग का सामना करने का निश्चित रूप से सामर्थ्य देगा ।