झाडू लगाने से सबंधित आचार : झाडू कब लगाएं ?
सायंकाल के समय झाडू न लगाएं; क्योंकि इस काल में वायुमंडल में रज-तमात्मक स्पंदनों का संचार बडी मात्रा में होता है ।
सायंकाल के समय झाडू न लगाएं; क्योंकि इस काल में वायुमंडल में रज-तमात्मक स्पंदनों का संचार बडी मात्रा में होता है ।
देवता को भोग लगाने के उपरान्त उस अन्न को देवता का प्रसाद मानकर ग्रहण करने से उस अन्न से देवता के तत्त्व एवं चैतन्य का लाभ होता है ।
हिन्दू धर्म के साढे तीन शुभमुहूर्ताें में से वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया एक है । इसीलिए इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं । इस तिथि पर कोई भी समय शुभमुहूर्त ही होता है । इस वर्ष २२ अप्रैल २०२३ को अक्षय तृतीया है ।
हिन्दुओं को प्रभु श्रीराम के नाम की शक्ति मिले, उनका आशीर्वाद मिले, इस उद्देश्य से रामनाम संकीर्तन आयोजित किया गया ।
प्राचीनकाल से ही हिन्दू धर्म में ऋषि-मुनियों की सहायता से जीवन की प्रत्येक क्रिया को उचित दिशा में मोडकर एक प्रकार से उसे सत्त्वगुणी रूप दिया गया है । इसी को ‘आचरण’ कहते हैं ।
इस कार्यक्रम में ‘हिन्दू नववर्ष’ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को क्यों मनाया जाता है ? इस दिन ब्रह्मध्वजारोहण क्यों किया जाता हैे ? ब्रह्मध्वजारोहण की उचित पद्धति’, साथ ही अन्य अध्यात्मशास्त्रीय जानकारी दी गई ।
३१ दिसंबर को रात १२ बजे आरंभ होनेवाले नववर्ष की तुलना, सूर्यास्त के पश्चात आरंभ होनेवाली तमोगुणी रात्रि से कर सकते हैं । प्राकृतिक नियमों के अनुसार आचरण मनुष्य के लिए पूरक है, जबकि विरुद्ध आचरण हानिकारक । अतः, पश्चिमी संस्कृति अनुसार १ जनवरी को नहीं; चैत्र शु. प्रतिपदा पर ही नववर्षारंभ मनाने में हमारा वास्तविक हित है ।’
महाशिवरात्रि पर सनातन संस्था द्वारा दिल्ली में कालकाजी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर व श्री सनातन धर्म मंदिर में, फरीदाबाद, नोएडा तथा मथुरा में विशेष ग्रंथ-प्रदर्शनी कक्ष लगाए गए ।
अधिकांश हिन्दुओं में अपने देवता, आचार, संस्कार, त्योहार आदि के विषय में आदर एवं श्रद्धा होती है; परंतु अनेकों को उनकी उपासना का धर्मशास्त्रीय आधार ज्ञात नहीं होता । इसे समझकर उचित पद्धति से धर्माचरण करने पर फलप्राप्ति अधिक होती है ।
हिन्दू धर्म के अनुसार, एक सुहागन(सौभाग्यवती) महिला से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने माथे पर बिंदी (कुमकुम) लगाए । इससे महिला को आध्यात्मिक स्तर पर लाभ होता है । हिन्दू महिलाएं इसका पालन नहीं करती क्योंकि उनके पास धार्मिक शिक्षा नहीं है !