Kashi Online Pind Daan : काशी में अब ऑनलाइन हो रहा है पिंडदान !
पंडित योगी आलोक ने बताया कि विदेश से श्रद्धालु पहले भी काशी आते रहे हैं, परंतु अब भीड अधिक होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पडता है । इसलिए अब वे ऑनलाइन पिंडदान करवाने लगे हैं ।
पंडित योगी आलोक ने बताया कि विदेश से श्रद्धालु पहले भी काशी आते रहे हैं, परंतु अब भीड अधिक होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पडता है । इसलिए अब वे ऑनलाइन पिंडदान करवाने लगे हैं ।
वर्षश्राद्ध करने से उस विशिष्ट लिंगदेह को गति मिलती है, जिससे उसका प्रत्यक्ष व्यष्टि स्तर का ऋण चुकाने में सहायता मिलती है ।
ब्रह्मदेव इच्छाशक्ति से संबधित होते हैं । अतः स्वयं को ब्रह्मात्मक इच्छा-ऊर्जा का अंश समझकर आवाहन करने से ब्रह्माण्ड की इच्छातरंगें कार्यरत होती हैं ।
नवमी के दिन ब्रह्माण्ड में रजोगुणी पृथ्वी एवं आप तत्त्वों से संबधित शिवतरंगों की अधिकता होती है…
‘तीर्थ की अपेक्षा घर में आठ गुना पुण्य प्राप्त होता है ।’
परिवार में जिस व्यक्ति के पिता अथवा माता की मृत्यु हो गई हो, उस श्राद्धकर्ता को माता अथवा पिता के लिए उनके देहान्त के दिन से आगे एक वर्ष तक महालय श्राद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती
अपने कुल के दिवंगत (पूर्व की न्यूनतम ३ पीढियों तक के) सभी पूर्वजों का श्राद्धकर्म करने का पक्ष (पखवाडा) है पितृपक्ष ! श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धापूर्वक किया जानेवाला अन्नदानादि कर्म ! इसका भाव अत्यंत कृतज्ञता, प्रेम एवं आदर व्यक्त करनेवाला है ।
यदि कोई वर्षभर में सदैव (प्रत्येक मास में) श्राद्ध न कर पाए एवं उसके लिए पितृपक्ष की अन्य तिथियों पर श्राद्ध करना सम्भव न हो, तब भी इस तिथि पर सबके लिए श्राद्ध करना अत्यन्त आवश्यक है; क्योंकि पितृपक्ष की यह अन्तिम तिथि है ।
श्राद्धकर्म विधि करने से होनेवाले लाभ जानने हेतु पढें सनातन के ग्रंथ !
पाठकों, शुभचिंतकों और धर्मप्रेमियों से विनम्र निवेदन तथा साधकों के लिए महत्त्वपूर्ण सूचना !