सद्गुरुद्वयी की महाकुम्भ पर्व की दिव्य यात्रा के अमूल्य क्षणमोती !

हिन्दू एकता की अभिव्यक्ति : सद्गुरुद्वयी ने किया ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के शिविर का अवलोकन !

विश्व हिन्दू परिषद के मुंबई के धर्माचार्य विभाग के प्रमुख श्री. नवलकिशोर पुराणिक ने दूरभाष द्वारा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी को (सद्गुरुद्वयी को) विश्व हिन्दू परिषद के शिविर में (पेंडॉल में) आने का निमंत्रण दिया था । ‘वि.हि.प. का संत सम्मेलन होनेवाला है, उसमें सद्गुरुद्वयी उपस्थित रहें’, यह श्री. पुराणिक की इच्छा थी । पिछले वर्ष अयोध्या के श्री रामलला की प्राणप्रतिष्ठा समारोह के समय वि.हि.प. के कोंकण प्रांत के पदाधिकारियों की सद्गुरुद्वयी के साथ निकटता हुई थी । उसके कारण उनसे मिलने हेतु सद्गुरुद्वयी ने वि.हि.प. के शिविर का अवलोकन किया । इस अवसर पर धर्माचार्य विभाग के पदाधिकारियों ने अत्यंत प्रेमपूर्वक तथा अपनेपन से सद्गुरुद्वयी का स्वागत किया । इसके साथ ही उन्हें वि.हि.प. के शिविर का परिसर दिखाया । सद्गुरुद्वयी ने संत निवास, कार्यकर्ता निवास, विशेषतापूर्ण अन्नपूर्णा कक्ष, कार्यालय, चिकित्सालय, प्रसिद्धि कक्ष, संत सम्मेलन के लिए बनाया गया भव्य मंडप इत्यादि का भ्रमण कर इस आयोजन का उद्देश्य समझ लिया । यह भेंट हिन्दू एकता की अभिव्यक्ति दर्शानेवाली थी ।

सद्गुरुद्वयी की आनंद अखाडे को भेंट : एक भावपूर्ण क्षण !

बाईं ओर से पू. प्रदीप खेमकाजी, स्मृतिचिन्ह देतीं श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी तथा स्मृतिचिन्ह का स्वीकार करते स्वामी बालकानंदगिरिजी

सनातन संस्था की गुरुपरंपरा शंकराचार्यजी के शिष्य तोटकाचार्य से उत्पन्न आनंद अखाडे के साथ की है । श्रीमद् चंद्रशेखरानंद परमहंस, श्री अनंतानंद साईशजी (श्री चंद्रशेखरानंद परमहंसजी के शिष्य), श्री भोलानंद (श्री भुरानंद) महाराजजी एवं संत भक्तराज महाराजजी (श्री अनंतानंद साईशजी के शिष्य, अखाडा परंपरा के अनुसार संत भक्तराज महाराजजी का नाम श्री नित्यानंद महाराज है), प.पू, रामानंद महाराजजी, प.पू. अच्युतानंद महाराजजी एवं प.पू. डॉ. आठवलेजी (संत भक्तराज महाराजजी के शिष्य) इस प्रकार से है । उसके कारण अखाडा परंपरा में सनातन संस्था का समावेश आनंद अखाडे के अंतर्गत होता है । उसके कारण इस मातृपीठ से भेंट करने हेतु प.पू. डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने (सद्गुरुद्वयी ने) अखाडे के वर्तमान आचार्य महामंडलेश्वर अनंत विभूषित श्री श्री १००८ स्वामी बालकानंदगिरिजी से भेंट की तथा उन्हें सनातन के रामनाथी (गोवा) आश्रम आने का निमंत्रण दिया । सद्गुरुद्वयी से मिलकर स्वामी बालकानंदगिरिजी बहुत आनंदित हुए तथा उन्होंने सनातन के कार्य को भरभरकर आशीर्वाद दिए ।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंदगिरिजी महाराज के ‘प्रभुप्रेमी संघ शिविर’ की व्यवस्था का जिज्ञासा के साथ अवलोकन !

इस पूरे महाकुम्भ पर्व में २० एकड परिसर में फैला जूना अखाडा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंदगिरिजी महाराज का ‘प्रभुप्रेमी संघ शिविर’ आकर्षण का केंद्रबिंदु रहा है । इस शिविर के व्यवस्थापक श्री. एस.एम. तुलश्याम ने सद्गुरुद्वयी को पूरा शिविर दिखाया । शिविर में स्थित मंदिर, प्रवचन कक्ष, आवास व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, सुरक्षाव्यवस्था, कार्यालय, चिकित्सालय, बिक्री केंद्र इत्यादि की रचना तथा उसका सूक्ष्म विचार उन्हें बताने के उपरांत ‘एक ही समय सहस्रों लोगों की व्यवस्था कैसे की जाती है ?’, यह इससे ध्यान में आया ।