देहली के हिन्दू पुजारियों की दयनीय स्थिति दिखानेवाला चलचित्र प्रदर्शित

बहुसंख्यक हिन्दुओं के देश में उनके पुजारियों पर ऐसी विकट स्थिति आना और उसपर प्रकाश डालने के लिए वृत्तचित्र निकालना पडे, यह हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद !

कश्मीर से विस्थापित हुए हिन्दुओं की दयनीय स्थिति !

एक समय में करोडों की संपत्ति रखनेवाले इन परिवारों पर अब विस्थापितों के शिविरों में जीवन व्यतीत करने की स्थिति आ गई है । लगभग ३.५ लाख कश्मीरी पंडित देहली और जम्मू के शिविरों में आज भी सड रहे हैं ।

कानपुर के एक निजी विद्यालय में हिन्दू छात्रों को इस्लामी ´कलमा´ पढ़ाया जा रहा है !

यदि भगवद् गीता का कोई श्लोक कभी किसी विद्यालय में मुसलमान या ईसाई छात्रों को पढ़ाया जाए या सुनाने के लिए कहा जाए, तो क्या वे कभी उसका पठन करेंगे ?

हिन्दू होना क्या लज्जाजनक (शर्म की) बात है ?

एक प्रसिद्ध हिन्दू शास्त्रज्ञ को ऐसा प्रश्न करना पड रहा है, इससे धर्मनिरपेक्ष भारत में हिन्दुओं की भयावह स्थिति ध्यान में आती है !

मध्यप्रदेश में हिन्दू छात्र की दो भागों में कटी मृतदेह मिली

‘सर तन से जुदा’ ऐसा संदेश मिलने से इस घटना के पीछे धर्मांध मुसलमान होने की शंका नकार नहीं सकते ! इससे बहुसंख्य हिन्दुओं के देश में हिन्दुओं का ही जीवन अधिकाधिक असुरक्षित होने का यह निर्देश है !

मैं गर्व से कहता हूं कि मैं हिन्दू हूं और हिन्दू होना ही मेरा खरा परिचय है !

भारत के कितने राजनेता ऐसा कहने का साहस जुटा पाते हैं ?

वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनावों के पूर्व केंद्रशासन सर्व हिन्दूविरोधी कानून रहित करे ! – पू. (अधिवक्ता) हरि शंकर जैन, सर्वाेच्च न्यायालय

देश में कृषि कानून, नागरिकत्व सुधार कनून के विरोध में आंदोलन हो सकता है, तो हिन्दुत्व के लिए आंदोलन क्यों नहीं हो सकता ? हिन्दुत्व के लिए देश को हिलाकर रख देना चाहिए । अब हिन्दुओं को यह दिखा देना चाहिए, ‘हिन्दूहित का लिए काम करनेवाले ही देश पर राज्य कर सकेंगे !

वह दिन दूर नहीं है जब हिन्दू एकत्रित आकर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करेंगे ! – अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सर्वाेच्च न्यायालय

ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना का (नमाज के पहले हाथ-पैर धोने का स्थान) पानी लगातार तीन दिन तक निकालने पर वहां भव्य शिवलिंग मिला । जिस समय मुझे उस भव्य शिवलिंग के दर्शन हुए, उस समय मैंने निश्चय किया कि, आगे से हिन्दुओं के आराध्य देवताओं का अनादर नहीं होने दूंगा ।

न्यायालय का निर्णय न माननेवालों को कर्नाटक राज्य के हिन्दुओं ने अच्छा पाठ पढाया है ! – अधिवक्ता अमृतेश एन्.पी., राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

‘‘कर्नाटक राज्य से आरंभ हुआ ‘हिजाबविरोधी आंदोलन’ कुछ दिन उपरांत राष्ट्रीय विषय बना । इसमें कुछ मुसलमान छात्राओं ने ‘हम हिजाब पहनेंगे ही’, इस मांग को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की । इस याचिका के पक्ष में लडने के लिए अनेक अधिवक्ता खडे रहे, तो सरकार के पक्ष में और विरोध में लडने के लिए अत्यंत अल्प संख्या में अधिवक्ता थे ।

गुजरात में दरगाह का मंदिर में कथित रूपांतर करने के विरुद्ध मुसलमान संगठन की ओर से जनहित याचिका !

हिन्दुओं, मुसलमानों से सीखें ! कितने हिन्दू और उनके संगठन उनके धार्मिक स्थलों के रूपांतर के विरुद्ध ऐसी तत्परता दिखाते हैं ?