
इरोड (तमिलनाडु) – सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिका में आए उल्लेख के अनुसार इरोड के श्रीमहाविष्णु के कस्तूरी रंगनाथ मंदिर में २२ से २४ जून २०२६ की अवधि में ३ दिवसीय ‘महासुदर्शन याग’ तथा २५ जून २०२६ को ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ । सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिका का वाचन करनेवाले पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी के मार्गदर्शन के अनुसार श्रीरंगम् के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर से आए २१ वेदपुरोहितों ने यह महायाग संपन्न किया ।


इस होम के समय सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी की वंदनीय उपस्थिति रही । इस होम में सप्तर्षि जीवनाडी-पट्टिका के भक्त श्री. और श्रीमती सोमाण्णाजी एवं श्री. सुंदरराजन्जी भी उपस्थित थे । ‘आयुष्य होम’ का पौरोहित्य शिवागम विद्यानिधि आगमाचार्य श्री. अरुणकुमार गुरुमूर्तिजी और उनके पिता श्री. गुरुमूर्ति शिवाचार्यजी ने किया ।
इस अवसर पर श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी ने भगवान शिव से, ‘‘संपूर्ण विश्व में शीघ्रातिशीघ्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को आरोग्यपूर्ण दीर्घायु प्राप्त हो तथा साधकों की साधना में आनेवाली सभी प्रकार की बाधाएं दूर हों ।’’ यह प्रार्थना की ।
महायाग के विशेष क्षण
१. इस महायाग के समय कुल १ लाख सुदर्शन महामंत्र का पुरश्चरण किया गया ।
२. तमिलनाडु के विविध पर्वतों पर उपलब्ध दैवी वनस्पतियों की इस महायाग में आहुति दी गई ।
३. ‘आगामी समय में विश्व पर व्याधिरूपी (रोग के रूप में) संकट आने पर वह दूर हो’, इसके लिए सामूहिक प्रार्थना की गई ।
४. ‘जीवन में आनेवाली सभी बाधाओं पर विजय प्राप्त कर सफलता प्राप्त हो’, इसके लिए सुदर्शन चक्र की शक्ति श्री विजयवल्ली देवी की विशेष पूजा की गई ।
५. यज्ञ की पूजा में रखे गए २ कलश शिव-पार्वती के प्रतीक थे । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने होम आरंभ करने के लिए दीप प्रज्वलित करना आरंभ किया, तब पार्वती देवी के कलश पर रखा कमल पुष्प नीचे गिर गया । ‘होम आरंभ होने से पूर्व ही देवी ने शुभ संकेत दिया है’, ऐसा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी ने कहा ।
६. होम की पूर्णाहुति के समय वहां एक वानर आया । होम के स्थान पर आकर उसने जल ग्रहण किया और उसे दिए गए केले खाए ।
इरोड शहर का आध्यात्मिक महत्त्व
जहां दुर्वासा ऋषि ने तपस्या कर श्रीविष्णु से प्रार्थना की थी, वह स्थान अर्थात तमिलनाडु में कावेरी नदी के तट पर स्थित इरोड शहर ! महर्षि दुर्वासा की तपस्या से संतुष्ट होकर श्रीमहाविष्णु ने उन्हें शेषशायी रूप में दर्शन दिए । उसी स्थान पर श्रीमहाविष्णु की शेषशायी रूप में स्वयंभू मूर्ति स्थापित है । इस स्थान पर स्थित भव्य मंदिर ही कस्तूरी रंगनाथ मंदिर है ! इसी मंदिर के चारों ओर इरोड शहर और इरोड वस्त्र बाजार बसा हुआ है ।
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