भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग पर टिप्पणी करने से मुझे स्थानांतरण करने की धमकी !
कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ती का सुनवाई के समय आरोप
कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ती का सुनवाई के समय आरोप
ऐसे आतंकवादियों को फांसी का दंड होना चाहिए, जनता को यही अपेक्षित है !
ऐसे लोगों को फांसी की ही सजा योग्य थी ,ऐसे जनता को लगता है!
न्यायालय के आदेश का अपमान करने वालों के विरुद्ध देश का एक भी धर्मनिरपेक्षतावादी राजनीतिक पक्ष तथा संगठन मुंह नहीं खोलते, यह ध्यान में ले !
दंगाइओं की ओर से देशभर में ‘अग्निपथ’ योजना का विरोध करते हुए तोडफोड, पथराव, रेल्वे गाडियों का जलाना आदि माध्यम से अरबों रुपयों की सरकारी एवं सामाजिक संपत्ति की हानि ! पटना (बिहार) – दंगाइओं से मुआवजा वसूल नहीं किया जा सकता, ऐसा निर्णय पटना उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान … Read more
वर्ष २०१५ की घटना का वर्ष २०२२ में निर्णय !
विलंब से मिलने वाला न्याय अन्याय ही है; जनता को ऐसा ही लगेगा !
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि पुलिस किसी भी आरोपी को बंदी बनाते समय उसे हथकडी नहीं लगा सकती।
‘‘कर्नाटक राज्य से आरंभ हुआ ‘हिजाबविरोधी आंदोलन’ कुछ दिन उपरांत राष्ट्रीय विषय बना । इसमें कुछ मुसलमान छात्राओं ने ‘हम हिजाब पहनेंगे ही’, इस मांग को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की । इस याचिका के पक्ष में लडने के लिए अनेक अधिवक्ता खडे रहे, तो सरकार के पक्ष में और विरोध में लडने के लिए अत्यंत अल्प संख्या में अधिवक्ता थे ।
‘दार-उल-इस्लाम’ धर्मांधों की संकल्पना है इसलिए उन्हें भारतभूमि को ‘गजवा-ए- हिंद’ बनाना है । अत: धर्मांधों द्वारा ‘लैंड जिहाद’ का षड्यंत्र रचा जा रहा है । यह रोकने के लिए ‘सब भूमी गोपाल की’ अर्थात ‘सब भूमि हमारी है’, यह तत्त्व मन में बिंबित करना होगा ।
‘प्रसिद्धि और पैसे मिलेंगे, इसलिए हिन्दू धर्म और धर्माभिमानियों की निंदा करो’ ऐसे षड्यंत्र आजकल बडी संख्या में बढ गए हैं । ‘माध्यमों के द्वारा होनेवाली अपकीर्ति को अनदेखा करना’, ऐसी भूमिका कुछ संगठनों की है । इसलिए ऐसे प्रसारमाध्यम अधिक फलते हैं; परंतु सनातन संस्था ने प्रारंभ से ही ऐसे माध्यमों के विरोध में कानूनी लडाई लडने की भूमिका निभाई है ।