मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के पश्चात अब तक २३ करोड ८२ लाख भक्तों ने श्रीराम के दर्शन किए हैं । इससे मंदिर को १२ सहस्र करोड रुपये की आय प्राप्त हुई है । इससे मंदिर की क्षमता को सभी को ध्यान में रखना चाहिए ।

Raja Matangi Yadnya : राष्ट्ररक्षार्थ मुंबई में हुआ ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने जिस नगरी से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, वह मुंबापुरी (मुंबई) अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा को वेदमंत्रों के घोष से गूंज उठी !

Shri Rajamatangi Mahayagya : राष्ट्र की अभिवृद्धि के लिए १७ मई को मुंबई में होगा श्री राजमातंगी महायज्ञ !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी तथा श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी की दिव्य उपस्थिति में होनेवाले इस महायज्ञ का लाभ सहस्रों देवीभक्त प्राप्त करेंगे ।

इंद्रप्रस्थ सांस्कृतिक महोत्सव में सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी को जिज्ञासुओं ने दिया उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर

‘संगम टॉक्स’ के श्री. राहुल दीवान एवं ‘गरुड प्रकाशन’ के श्री. संक्रांत सानू के अथक प्रयासों से देहली में पहली बार आयोजित इस महोत्सव के कारण राजधानी के नागरिकों को उनकी जडों से जुड जाने का अवसर प्राप्त हुआ ।

झारखंड एवं बंगाल में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए मंदिरों में सामूहिक प्रार्थना कर देवताओं के चरणों में मन्नत मांगी !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ८४वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।

धर्मशास्त्र एवं अध्यात्मशास्त्र

सनातन भारत : समाज, राष्ट्र, धर्म एवं अध्यात्म के संदर्भ में प्रासंगिक सूत्रों पर भाष्य करनेवाला स्तंभ

धार्मिक कृत्य उचित पद्धति से करने हेतु मार्गदर्शक सनातन के ग्रंथ !

पंचोपचार एवं षोडशोपचार पूजन का अध्यात्मशास्त्रीय आधार, देवालय में देवता के प्रत्यक्ष दर्शन से पूर्व के कृत्यों का अध्यात्मशास्त्र

Sanatan Sanstha Press Meet : भारत की रक्षा हेतु मुंबई में १७ मई को ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ !

संपूर्ण विश्व पर वर्तमान में तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं । ऐसी स्थिति में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं । राष्ट्र को आध्यात्मिक अधिष्ठान की महती आवश्यकता है ।

मुंबई में होनेवाले श्री राजमातंगी महायज्ञ का विभिन्न स्थानों पर बैठकों के माध्यम से प्रचार !

आदिशक्ति देवी सती के १० स्वरूपों अर्थात दशमहाविद्याओं में से एक श्री राजमातंगी देवी हैं । श्री राजमातंगी देवी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री (सलाहकार) तथा शक्ति एवं वाणी की देवी हैं । राष्ट्र के सर्वांगीण विकास एवं धर्मकार्य के लिए देवी का आशीर्वाद अत्यंत महत्त्वपूर्ण है ।

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को श्री राजमातंगी महायज्ञ का निमंत्रण दिया गया ।

इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ‘यज्ञ में आने का प्रयास करूंगा’, ऐसा आश्वासन दिया । इस अवसर पर सनातन संस्था की श्रीमती धनश्री केळशीकर, श्री. अशोक दाभोलकर एवं श्री. प्रीतम नाचणकर उपस्थित थे ।