डॉ. दाभोलकर हत्या प्रकरण के आरोपी शरद कलसकर को आधिकारिक जमानत स्वीकृत l
अगस्त २०१८ में महाराष्ट्र आतंकवादविरोधी दल ने श्री. शरद कलसकर को बंदी बनाया था ।
अगस्त २०१८ में महाराष्ट्र आतंकवादविरोधी दल ने श्री. शरद कलसकर को बंदी बनाया था ।
मीरा बोरवणकर हिन्दुत्वनिष्ठों की भावनाएं कब समझेंगी ? – चेतन राजहंस
डॉ. अमित थढानी गत २५ वर्षाें से मुंबई तथा नई मुंबई में व्यवसाय करनेवाले प्रसिद्ध ‘जनरल सर्जन’ (शल्यविशारद) हैं । वे ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ के चेंबूर शाखा के भूतपूर्व अध्यक्ष तथा डॉक्टरों की संस्थाओं के प्रमुख सदस्य हैं ।
कॉ. पानसरे, डॉ. नरेंद्र दाभोलकर जैसे तथाकथित प्रगतिवादियों की हत्या के मामलों में जांच एजेंसियों पर भारी दबाव डाला गया। जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच पर ध्यान दिए बिना, सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की बार-बार मांग की गई।
भारत की संस्कृति ५ व्यवस्थाओं परिवार व्यवस्था, धर्म व्यवस्था, देशभक्ति, शिक्षा व्यवस्था एवं लोकतंत्र पर आधारित है। अतः वामपंथी तथा जिहादी इन ५ प्रणालियों को नष्ट करना चाहते हैं। सबसे पहले वे परिवार व्यवस्था को नष्ट करना चाहते हैं।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले मे डॉ तावरे ने शव परीक्षण किया है और इस मामले मे सबूत गायब करने का उन पर शक है ।ऐसा समाचार ‘हिंदुस्तान पोस्ट’, इस जालस्थल ने प्रसारित किया है ।
सभी संदिग्ध अपराधियों पर लगाया ‘यु.ए.पी.ए.’ (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) न्यायालय ने हटाया !
१० मई को न्यायालय ने डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्या प्रकरण में सनातन संस्था के साधक श्री. विक्रम भावे को निर्दाेष मुक्त किया । न्यायालय के इस निर्णय का हम स्वागत करते हैं ।
आज ‘हिन्दू आतंकवाद’ का षड्यंत्र रचनेवालों की पराजय हुई है, साथ ही इस प्रकरण में दोषी प्रमाणित हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ता सचिन अंदुरे एवं शरद कळसकर को भी निर्दाेष मुक्त कराने हेतु हम लडेंगे’, ऐसा सनातन संस्था ने इस अवसर पर घोषित किया ।
आज अदालत ने मुझे बरी कर दिया हैं। मेरे दृ्ष्टी से, यही परिणाम अपेक्षित था। मुझे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया। मेरे ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं था। इसलिए अदालत के सामने कोई सबूत नहीं आया ।