Mangalprabhat Lodha On Jainism : जैन समाज हिन्दू ही है तथा उसे प्राप्त ‘अल्पसंख्यक’ स्तर को त्याग देना चाहिए !
राजनीतिक लाभ के लिए थोपा गया ‘अल्पसंख्यक’ का यह ठप्पा अब पोंछ डालने का समय आ गया है । जैन धर्मावलंबियों की पूजा पद्धति भिन्न हो सकती है ; परंतु सांस्कृतिक जडें हिन्दू धर्म में ही समाहित हैं ।