देवता, भारतमाता तथा राजनीतिक बलिदानी के नाम पर शपथ नहीं ली जा सकती । – Kerala High Court

केरल उच्च न्यायालय का निर्णय ।

तिरुवनंतपुरम (केरलम्) – स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि शपथ लेते समय विधि द्वारा निर्धारित शब्दों की परिधि से बाहर नहीं जा सकते, अर्थात् शपथ ईश्वर के नाम पर ली जा सकती है अथवा ईश्वर का नाम लिए बिना गंभीरतापूर्वक (सत्यनिष्ठा की) प्रतिज्ञा की जा सकती है । उसमें देवता, भारतमाता, कोई संगठन, राजनीतिक बलिदानी या किसी भी व्यक्ति का नाम जोडना स्वीकार्य नहीं माना जाएगा । अपनी ओर से कोई भी नवीन शब्द जोडना पूर्णतः त्रुटिपूर्ण माना जाएगा, ऐसा निर्णय केरल उच्च न्यायालय ने दिया है । इसके लिए न्यायालय ने केरलम् नगरपालिका अधिनियम एवं केरलम् पंचायत राज एक्ट का संदर्भ दिया ।

१. तिरुवनंतपुरम नगरपालिका के २० पार्षदों ने शपथ लेते समय हिन्दुओं के देवता, ‘भारतम्बा’, ‘भारतमाता’, ‘गुरुदेव’ , तथा अपने राजनीतिक आंदोलन के बलिदानियों के नामों का उल्लेख किया था । इसके साथ ही पालक्कड जनपद के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य ने ‘ईश्वर की कृपा से उम्मन चंडी’ के नाम पर शपथ ली थी । इन दोनों प्रकरणों पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रश्न किया कि क्या विधि शपथ के निर्धारित प्रारूप से बाहर जाने की अनुमति देती है ?

२. न्यायालय ने कहा कि शपथ केवल एक औपचारिकता नहीं है । निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान का अनुपालन करेगा, विधि के अनुसार कार्य करेगा तथा प्रामाणिकता से जनता की सेवा करेगा, यह जनता को दिया गया एक गंभीर वचन है । अतएव विधि में लिखित पद्धति से ली गई शपथ ही वैध मानी जाएगी । यद्यपि लोग भगवान को विभिन्न नामों से पुकारते हैं, तथापि विधिक रूप से शपथ केवल ईश्वर के नाम पर या गंभीरतापूर्वक प्रतिज्ञा से ही ली जा सकती है । इसमें अपनी ओर से कोई भी नाम जोडना उचित नहीं है ।

पुनः लेनी होगी शपथ ।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शपथ त्रुटिपूर्ण पद्धति से ली गई थी, इसलिए उसे वैध नहीं माना जा सकता; परंतु केवल इसी कारण से निर्वाचित प्रतिनिधियों का जनादेश निरस्त नहीं किया जाएगा । न्यायालय ने आदेश दिया है कि तिरुवनंतपुरम नगरपालिका के पार्षद तथा वडक्कनचेरी पंचायत सदस्य ४ सप्ताह के भीतर पुनः एक बार उचित पद्धति से शपथ ग्रहण करें । इन लोगों ने संभवतः अपनी पद्धति को विधिक रूप से उचित समझकर ऐसा किया होगा । इसलिए उन पर कोई दंड आरोपित नहीं किया जाएगा ।

पंचायत सदस्य द्वारा किए गए कार्य निरस्त होंगे ।

तिरुवनंतपुरम नगरपालिका के पार्षदों के संदर्भ में न्यायालय ने राहत प्रदान की है । न्यायालय ने कहा है कि अब तक उनके द्वारा किए गए कार्य केरलम् नगरपालिका विधि की धारा ५३१ के अंतर्गत सुरक्षित रहेंगे । अर्थात् , उनकी अब तक की कार्यवाही केवल शपथ के त्रुटिपूर्ण आधार पर निरस्त नहीं होगी, परंतु वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के संदर्भ में स्थिति भिन्न है । पंचायत राज विधि में ऐसी सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है । इसलिए उस सदस्य द्वारा अब तक किए गए कार्य अमान्य माने जाएंगे, तथापि उसे भी पुनः शपथ लेने का अवसर प्रदान किया गया है ।