Minorities Financial Development Corporation : निर्वाचनों में विजय प्राप्त करने हेतु कांग्रेस द्वारा ‘मौलाना आजाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल’ का राजनीतिक उपयोग !

  • वर्ष २००९ एवं २०१४ के विधानसभा निर्वाचनों से पूर्व बड़े स्तर पर विना प्रतिभूति (बिना गारंटी) ऋणों का वितरण !

  • ४३ सहस्र व्यक्तियों पर १५८ करोड रुपये शेष (बकाया), वसूली केवल १२.७८ प्रतिशत !

श्री. प्रीतम नाचणकर , प्रतिनिधि, सनातन प्रभात, मुंबई

मुंबई, १८ अप्रैल – पिछडे अल्पसंख्यकों के आर्थिक विकास हेतु स्थापित किए गए ‘मौलाना आजाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल’ का उपयोग कांग्रेस ने निर्वाचन जीतने के लिए किया । वर्ष २००९ एवं २०१४ के विधानसभा निर्वाचनों से पूर्व मंडल के माध्यम से कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों में, विशेषतः मुसलमानों को बड़ी संख्या में विना प्रतिभूति ऋण वितरित किए । वर्ष २००१ से दिए गए इस ऋण की वसूली अब तक केवल १२.७८ प्रतिशत ही हुई है । विगत २५ वर्षों में लगभग ४३ सहस्र ४१२ लाभार्थियों से इस ऋण की १५८ करोड ५३ लाख ४५ सहस्र रुपयों की वसूली शेष है । ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि श्री. प्रीतम नाचणकर को सूचना के अधिकार के अंतर्गत यह जानकारी प्राप्त हुई है ।

वर्ष २००० में ‘मौलाना आजाद अल्पसंख्यक आर्थिक विकास महामंडल’ की स्थापना की गई थी । वर्ष २००१-०२ में २०१ व्यक्तियों को ७४ लाख रुपयों का ऋण दिया गया । वर्ष २००२-०३ से २००६-०७ के कालखंड में ऋण नहीं दिया गया । वर्ष २००७-०८ में २०५ व्यक्तियों को ९० लाख रुपयों का, तो वर्ष २००८-०९ में १४७ व्यक्तियों को ६५ लाख ८ सहस्र रुपयों का ऋण दिया गया । वर्ष २००९ में विधानसभा निर्वाचन से पूर्व ऋण देने का प्रमाण ६८ गुणा बढाकर १३ सहस्र ६९६ व्यक्तियों को ४६ करोड ६९ लाख ५६ सहस्र रुपयों के ऋण की भीख बांटी गई । तत्पश्चात वर्ष २०१३-१४ तक ऋण वितरण न्यून कर दिया गया तथा वर्ष २०१४ के विधानसभा निर्वाचन से पूर्व ११ सहस्र ३६ व्यक्तियों को ४४ करोड १४ लाख ४० सहस्र रुपयों का ऋण दिया गया ।

वर्ष २००९ में सत्ता में आने पर ऋणमुक्ति !

अक्टूबर २००९ में हुए विधानसभा निर्वाचन में राज्य में पुनः कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन की सत्ता आई । उसके उपरांत तत्काल १७ नवंबर २००९ को अल्पसंख्यक विकास विभाग ने शासन निर्णय निकाल कर ३१ मार्च २००७ तक दिए गए समस्त ऋणों को ब्याज सहित क्षमा (माफ) कर दिया । ऋणमुक्ति हेतु राजकीय कोष से १७ करोड २२ लाख रुपये देने पडे । वर्ष २०१४ के विधानसभा निर्वाचन में गठबंधन की पराजय हुई तथा शिवसेना-भाजपा महायुति सत्ता में आई । कदाचित् गठबंधन सरकार पुनः सत्ता में आती, तो शेष ऋण भी क्षमा कर दिए जाते !

वसूली न होने पर भी ऋण वितरण !

राज्य में महायुति की सरकार आने पर वर्ष २०१५-१६ में २ सहस्र ८३७ व्यक्तियों को ११ करोड ३४ लाख ४० सहस्र रुपयों का, तो वर्ष २०१६-१७ में ४२ व्यक्तियों को १८ लाख ९७ सहस्र रुपयों का ऋण वितरित किया गया; किन्तु संपूर्णतः ऋण वसूली न होने की बात ध्यान में आने पर वर्ष २०१७ से इन ऋणों का वितरण बंद कर दिया गया । मूलतः महामंडल द्वारा शैक्षणिक ऋण वितरण की योजना प्रारंभ करने के समय से ही उसकी वसूली नहीं हो रही थी, फिर भी कांग्रेस गठबंधन ने निर्वाचन के समय इन ऋणों का वृहद स्तर पर वितरण किया, साथ ही वसूली की स्थिति दयनीय होने पर भी सत्ता में आने के पश्चात महायुति सरकार ने भी १ वर्ष ऋणों का वितरण बड़े स्तर पर किया ।

ऋण लेने वालों के खाते में धन ही नहीं है ! – मौलाना आजाद आर्थिक विकास महामंडल

ऋण की वसूली हेतु महामंडल द्वारा वसूली दलों की नियुक्ति की गई है; किन्तु जिन्होंने ऋण लिए, उन्होंने ‘खाते में धन नहीं है । अतः ऋण वसूली करने में मर्यादाएं हैं’, ऐसे कारण दिए जाने की सूचना महामंडल के अधिकारियों ने दी है ।

कुल मिलाकर सहस्रों लाभार्थियों से ऋण की वसूली करना महामंडल हेतु सिरदर्द बन गया है तथा संचालक मंडल सरकार को ऋणमुक्ति का प्रस्ताव भेजने का कार्य किया । अतः मुसलमानों के मत प्राप्त करने हेतु कांग्रेस द्वारा शैक्षणिक ऋण के माध्यम से बांटी गई इस भीख का भार पुनः जनता के मस्तक पर पडने की संभावना है ।

संपादकीय भूमिका

महाराष्ट्र सरकार ऐसे महामंडल को समाप्त क्यों नहीं करती ? ऐसा प्रश्न जनता के मन में उपस्थित होता है !