चुनाव आयोग को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है ! – Justice BV Nagarathna

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना का मत

सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना

पाटलिपुत्र (बिहार) – चुनाव आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) एवं वित्त आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं का स्वतंत्र रहना एवं राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, ऐसा मत सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने यहाँ व्यक्त किया । वे ‘चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ में व्याख्यान दे रही थीं ।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने आगे कहा कि:

१. चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली प्रक्रिया नहीं है, अपितु यह ऐसा तंत्र है, जिसके माध्यम से राजनीतिक सत्ता स्थापित होती है । इसलिए चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण का अर्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के अनुबंधों पर नियंत्रण है ।

२. सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग को ‘उच्च संवैधानिक संस्था’ माना है । यदि चुनाव कराने वाली संस्था चुनाव लडने वालों पर निर्भर हो, तो प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो सकती ।

३. संवैधानिक पतन अचानक नहीं होता, अपितु वह तब प्रारंभ होता है, जब संस्थागत ढांचा धीरे-धीरे अशक्त होने लगता है । जब संस्थाएं एक-दूसरे पर नियंत्रण रखना बंद कर देती हैं, तब चुनाव होते हैं, संसद चलती है; किन्तु सत्ता पर प्रभावी नियंत्रण समाप्त हो जाता है ।

४. राज्य सरकारें संविधान के अनुसार केंद्र सरकार के अधीन नहीं हैं, अपितु उन्हें समान स्तर प्राप्त है । विकास योजनाओं में राज्यों के प्रति ‘रुचि एवं अरुचि ‘ का दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए, इसका भी उन्होंने उल्लेख किया ।