देवस्थान भूमि के संदर्भ में सरकारी देवस्थान समिति की पहली बैठक संपन्न हुई !

‘देवस्थान इनाम निर्मूलन’ नहीं अपितु ‘देवस्थान भूमि संरक्षण कानून’ करने की दृष्टि से सरकारी देवस्थान समिति अचल ।

बैठक के समय उपस्थित महाराष्ट्र के राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले एवं अन्य मान्यवर

मुंबई – राज्य की देवस्थान इनाम भूमियों का संवर्धन कर वर्षाें से लंबित समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए ‘देवस्थान इनाम निर्मूलन’ नहीं, अपितु ‘देवस्थान भूमि संरक्षण कानून’ बनाने के लिए सरकारी देवस्थान समिति ने दृढतापूर्ण भूमिका अपनाई है । कुछ ही दिन पूर्व मंत्रालय में राज्य के राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में ‘देवस्थान इनाम भूमि संवर्धन समिति’की पहली बैठक संपन्न हुई । इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न देवस्थानों के प्रबंधक उपस्थित थे ।

इस बैठक में राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नए कानून का प्रारूप तैयार करते समय उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय के लंबित प्रकरणों, साथ ही पुराने कानूनों का अध्ययन कर भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता उत्पन्न न हो, इसकी ओर ध्यान देने की सूचना दी।

१. बैठक के आरंभ में देवस्थान समिति की ओर से प्रस्तावित कानून की अध्येतपूर्ण रचना का विशेष प्रस्तुतिकरण (पीपीटी) किया गया ।

२. प्रस्तावित कानून बनाने के लिए देवस्थान समिति को वर्गवारी के अनुसार राज्य के सभी देवस्थानों के भूमियों की जानकारी उपलब्ध कराना, पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान व्यवस्थापन समिति के अधीन सहस्रों एकड भूमियों के घोटाले का ब्योरा समिति के सामने प्रस्तुत करना, विशेषकर रत्नागिरी एवं सिंधुदुर्ग, इन जिलों में स्थित ‘देवराई’के कुछ सहस्रों एकड भूमियों पर जो सरकार का नाम लगा है, उसे बदलकर उन भूमियों पर किए गए अतिक्रमण एवं अवैध प्रविष्टियां, देवस्थानों की गोठबस्तियों की भूमियों के संबंध में उत्पन्न विवाद आदि जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई ।

३. इस नए कानून को केवल भूमियों तक ही सीमित न रखते हुए यह कानून देवस्थानों का सर्वांगीण हित संजोने वाला होना चाहिए, यह सुनिश्चित किया गया ।

४. वक्फ बोर्ड की भूमियों की भांति ही हिन्दू देवस्थानों की भूमियों को भी विशेष कानूनी संरक्षण मिले, इसकी ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया ।

५. दिसंबर २०२६ से मार्च २०२७ तक के अधिवेशन में इस संबंध में एक परिपूर्ण कानून बने, इसके लिए प्रतिसप्ताह प्रत्यक्षरूप से तथा ऑनलाइन बैठकें करना सुनिश्चित किया गया ।

इस बैठक में राजस्व विभाग के प्रधान सचिव विकास खारगे, सहसचिव कैलास गायकवाड सहित राज्य विभाग की सहसचिव मनीषा जायभाए, उपसचिव संजय धारुरकर तथा विधि एवं न्याय विभाग के उपसचिव उपस्थित थे ।

इसके साथ ही इस बैठक में कोंकण एवं पुणे मंडल आयुक्त, साथ ही ठाणे एवं अहिल्यानगर के जिलाधिकारी उपस्थित थे । इसके अतिरिक्त समिति के सदस्य श्री. संदीप महाजन, अधिवक्ता आशिष सोनवणे, श्री. संजीव देशपांडे, श्री. अनिल सांबरे, अधिवक्ता राजेश मुधोलकर, श्री. जगदीश पाटिल, अधिवक्ता रवींद्र क्षीरसागर, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, श्री. अनुप जायसवाल, श्री. विजय पोरे तथा चिंचवड देवस्थान प्रबंध के प्रबंधक श्री. केशव विद्वांस उपस्थित थे ।