बांग्लादेश में गत ५ महीनों में हिन्दुओं के विरुद्ध ६४५ आपराधिक घटनाएं प्रविष्ट हुईं !

९५ मंदिरों में तोडफोड

ढाका (बांग्लादेश) – १२ फरवरी २०२६ को हुए राष्ट्रीय निर्वाचनों से अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अब तक ६४५ घटनाओं के आंकडे प्राप्त हुए हैं । सामाजिक माध्यमों पर हिन्दू समुदाय एवं इस्कॉन को लक्ष्य बनाकर भडकाऊ सामग्री प्रसारित की जा रही है, यह जानकारी मानवाधिकार संगठन ‘ए.एस्.के.’, बांग्लादेश हिन्दू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद एवं एच.आर.सी.बी.एम. के आँकडों से उजागर हुई है ।

१. मुस्लिमों की स्थानीय बैठकों में अल्पसंख्यकों के सामाजिक बहिष्कार एवं उनकी संगठनों पर प्रतिबंध की मांग की जा रही है । कई स्थानों पर हिन्दुओं को धमकिया भी दी गई हैं ।

२. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार हिन्दुओं की भूमि हथियाने की १३२ घटनाए उजागर हुई है । कई परिवारों को घरों से निकालने की धमकिया दी गईं तथा घरों को तोडने के आरोप भी प्रविष्ट हुए हैं । ९५ मंदिरों में तोडफोड एवं अपमानजनक व्यवहार किए गए हैं ।

३. कुमिला के निवासी नंदित कुमार के अनुसार, हिन्दू-विरोधी वातावरण प्रमुख रूप से सामाजिक माध्यमों द्वारा बनाया जा रहा है । षड्यंत्र का संदेह निर्माण करने वाले संदेश निरंतर प्रसारित किए जा रहे हैं । ऐसी सामग्री पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया तो परिस्थिति कभी भी बिगड सकती है । गाइबांधा में श्रीराम मूर्ति स्थापना का विरोध भी एक बडे राजनीतिक षड्यंत्र का भाग बताया जा रहा है ।

४. बांग्लादेश हिन्दू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ के अनुसार, किसी भी समुदाय के लिए केवल प्रत्यक्ष हिंसा ही नहीं, अपितु निरंतर मिल रही धमकियां भी भय का कारण बनती हैं । सार्वजनिक रूप से धमकियां देने वालों पर कार्रवाई न होने से लोगों का शासन-प्रणाली पर विश्वास समाप्त होता जा रहा है ।

प्रशासकीय निष्क्रियता

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अभियुक्तों पर समुचित एवं प्रभावी कार्रवाई न होने से अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना निरंतर बढी है एवं उनका विश्वास डगमगा गया है ।

संपादकीय भूमिका

बांग्लादेश में चाहे कोई भी सरकार आए, वह धर्मान्धों की ही रहेगी - यह स्पष्ट होने के कारण ये घटनाएं कभी रुकेंगी नहीं यही वास्तविकता है ! वहां के हिन्दुओं की रक्षा के लिए प्रथमत: भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना आवश्यक है !