युक्रेन-रूस युद्ध में भारतीय सैनिकों को शांति मिशन के लिए भेजने का उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का प्रस्ताव था ।

वॉशिंगटन (अमेरिका) – अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने यूक्रेन-रूस युद्ध के समय शांति मिशन चलाने के लिए भारतीय सेना को वहां भेजने का प्रस्ताव रखा था, परंतु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे निरस्त कर दिया । ऐसा दावा एक नई पुस्तक में किया गया है । पुस्तक के अनुसार ट्रंप ने कहा था, “भारतीय ऐसा नहीं करेंगे । वे ऐसी चीजों पर पैसा खर्च नहीं करेंगे ।”
‘रिजीम चेंज– ;इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ नामक पुस्तक, जिसे द न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन तथा जोनाथन स्वान ने लिखा है, के अनुसार ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालने के १० दिन बाद, ३० जनवरी २०२५ को ओवल ऑफिस में जे.डी. वेंस एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यूक्रेन-रूस युद्ध में अमेरिका की भूमिका तय करने के लिए बैठक की थी । इस बैठक में रूस एवं यूक्रेन के विशेष दूत सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग भी उपस्थित थे ।
केलॉग की “ट्रंप ऐतिहासिक शांति समझौता” योजना में ब्रिटिश, फ्रांसीसी तथा डच शांति सैनिकों को सम्मिलित करने का प्रस्ताव था । हालांकि वेंस ने नाटो देशों की सेनाओं को भेजने का विरोध किया । उनका कहना था कि यदि नाटो देशों की सेनाएं भेजी गईं, तो रूस अत्यधिक भडक सकता है, क्योंकि वह पहले से ही नाटो के प्रति अविश्वास व्यक्त करता रहा है ।
इसके बाद वेंस ने पूछा कि क्या इस कार्य के लिए यूरोप के बाहर के किसी देश की सेना को सम्मिलित किया जा सकता है । उन्होंने भारत का नाम सुझाया । उस समय ट्रंप ने इसका विरोध किया । ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरे घनिष्ठ संबंध हैं । मोदी मुझे बहुत पसंद करते हैं एवं मैं उनसे मिलना चाहता हूं ।”
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