धर्मशिक्षा, धर्मजागृति एवं धर्मरक्षा के लिए संस्कृत भाषा उपयुक्त ! – डॉ. अजित चौधरी, प्राचार्य, यशवंतराव चव्हाण पॉलिटेक्निक, बीड

“सहस्रों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने संस्कृत भाषा में ही अनेक अविष्कार लिखकर रखे हैं । ऐसी सर्वार्थ से आदर्श देववाणी संस्कृत को व्यावहारिक भाषा बनाने के लिए हमें प्रयास करने चाहिएं; इसलिए प्रत्येक परिवार को अपने बच्चों को बचपन से अंग्रेजी नहीं, अपितु संस्कृत भाषा की शिक्षा देना आवश्यक है ।”, ऐसा मत उन्होने व्यक्त किया.

सिख, जैन, बौद्ध आदि को वे हिन्दू हैं, यह समझ लेना चाहिए ! : – कर्नल करतार सिंह मजीठिया, कृपाल रूहानी फाउंडेशन, गोवा

धर्म की रक्षा के लिए हिन्दुओं को किसी पर भी निर्भर नहीं रहना चाहिए । हिन्दू धर्म और मंदियों पर आक्रमण करनेवालों को हिन्दुओं ने नहीं छोडना चाहिए । हिन्दू किसी पर आक्रमण न करें; परंतु स्वयं की रक्षा के लिए हिन्दुओं को तैयार रहना चाहिए,

वीरशैव लिंगायत हिन्दू ही हैं ! – पू. श्री.ष.ब्र.प्र.१०८ (डॉ.) विरुपाक्ष शिवाचार्य महास्वामीजी, मठाधिपति, गणाचार्य मठ संस्थान, मुखेड, नांदेड, महाराष्ट्र

अखंड हिन्दुस्थान यह हिन्दू राष्ट्र ही है; परंतु उसे ‘सेक्युलर’ ठहराने का प्रयत्न किया जा रहा है । भारत में भले ही विविध संप्रदाय हों, तब भी सभी लोग हिन्दू धर्म की भांति आचरण करते हैं ।

अखंड भारत के लिए गोहत्या रोकना आवश्यक ! – सतीश कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, गोरक्षा दल

जब से देश में गोहत्या प्रारंभ हुई है, तब से अखंड भारत के टुकडे हुए हैं । गोमाता भूमाता का रूप है । जिस भूमि पर उसके टुकडे होंगे, उस भूमि के टुकडे होंगे ।

धर्मनिरपेक्ष सरकार के द्वारा केरल में हिन्दू धर्म एवं संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास ! – राकेश नेल्लिथया, केरल

केरल की स्थिति अत्यंत भयावह है । वहां मुसलमानों की जनसंख्या ३० प्रतिशततक पहुंच गई है, जिससे वहां कश्मीर की भांति स्थिति बनती जा रही है ।

नक्सलवादी एवं ईसाई धर्मप्रचारकों की देशविरोधी युति ! – अधिवक्ता (श्रीमती) रचना नायडू, छत्तीसगढ

नक्सलवादियों द्वारा वनवासी बच्चों के हाथों में बलपूर्वक बंदूकें पकडाई जाती हैं । नक्सलवादी संगठनों में सम्मिलित होने से नकार देनेवालों की क्रूरता से हत्या कर दी जाती है ।

हिन्दू जनसंघर्ष मोर्चा का जनआंदोलन हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होनेतक जारी रखेंगे ! – कु. प्रियांका लोणे, समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति, संभाजीनगर

हिन्दुओं पर हो रहे आघातों के विरुद्ध आवाज उठानी है । जबतक मातृभूमि से लव जिहाद एवं धर्मांतरण का षड्यंत्र नष्ट होकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना नहीं हो जाती, तबतक हमें यह संघर्ष जारी रखना है ।

न्यायव्यवस्था में कर्मफलन्याय सिद्धांत का समावेश अत्यावश्यक ! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

एक ही प्रकार का अपराध होते हुए भी अपराधियों को भिन्न दंड क्यों दिया जाता है ? उसके पीछे क्या कर्मफलसिद्धांत है ? जब एकाध द्वारा बलात्कार के समान अपराध होता है, तब उसके पीछे ‘काम’ एवं ‘क्रोध’ ये षड्रिपुओं के दोष समाहित होते हैं । क्या उसका अध्ययन नहीं होना चाहिए ?

उत्तर-पूर्व भारत में हिन्दू धर्मरक्षा के लिए प्रयास होने आवश्यक ! – अधिवक्ता राजीव नाथ, जिलाध्यक्ष, हिन्दू जागरण मंच, कछार, असम

अधिवक्ता राजीव नाथ ने आगे कहा, ‘‘असम में ब्रिटिशों के काल से ईसाई पंथियों की संख्या अधिक है । जहां-जहां उनकी संख्या बढी, वहां देश विभाजित हुआ है । असम में मुसलमानों की जनसंख्या भी ३६ प्रतिशत से अधिक है, साथ ही वहां के ९ जिले मुसलमानबहुल बन गए हैं ।

समलैंगिकता को मान्यता देने से भारत के अनेक कानूनों पर दुष्परिणाम होगा ! – अधिवक्ता मकरंद आडकर, अध्यक्ष, महाराष्ट्र शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्था, नवी देहली

देश में समलैंगिकता तथा समलैंगिक विवाहों को मान्यती दी गई, तो हिन्दू विवाह कानून का क्या होगा ? भरणभत्ता किसे दिया जाए ? महिलाओं को संरक्षण देनेवाले घरेलु अत्याचार प्रतिबंधक कानून का क्या होगा ? पत्नी पर अत्याचार हुआ, तो पत्नी के रूप में किसे न्याय मिलेगा ?