
रामनाथ देवस्थान – छत्तीसगढ में वनवासी भी हिन्दू ही हैं । उन पर ईसाई धर्मप्रचारक एवं नक्लवादियों द्वारा प्रचंड अत्याचार हो रहे हैं; परंतु उन सभी घटनाओं का प्रसारमाध्यम उल्लेख नहीं करते । आज वनवासी हिन्दू अपनी लडाई अकेले लड रहे हैं । इसलिए उन्हें देशव्यापी समर्थन मिलना आवश्यक है ।
नक्सलवादी एवं ईसाई धर्मप्रचारकों की युति है । जहां विपुल खनिज संपत्ति एवं वनवासी हैं, उसी स्थान पर ईसाई धर्मप्रचारक एवं नक्सलवादियों ने अपना डेरा डाला है । ईसाई धर्मप्रचारक षडयंत्र रचकर हिन्दू वनवासियों का भारी मात्रा में धर्मपरिवर्तन कर रहे हैं । एशिया खंड में सबसे बडे चर्च छत्तीसगढ में हैं । वे वनवासियों को प्रलोभन देकर उनका सर्वस्व हथिया रहे हैं । उनके शिकंजे से भले ही छुडवा लिया जाए, तब भी उनके द्वारा हथियाई गई संपत्ति हम पुन: प्राप्त नहीं कर सकते, इतनी बडी उनकी यंत्रणा है ।
नक्सलवादियों ने प्रतिदिन विस्फोट कर छत्तीसगढ में बस्तर की भूमि रक्तरंजित की है । नक्सलवादियों द्वारा वनवासी बच्चों के हाथों में बलपूर्वक बंदूकें पकडाई जाती हैं । नक्सलवादी संगठनों में सम्मिलित होने से नकार देनेवालों की क्रूरता से हत्या कर दी जाती है । आज नक्सलवादियों के समर्थन में बडे-बडे अधिवक्ता खडे होते हैं, लेखकों द्वारा पुस्तकें लिखी जाती हैं और पत्रकारों द्वारा समाचार दिए जाते हैं । नक्सलवादियों के जिहादी आतंकवादी संगठन ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’की सांठगांठ है । इसके साथ ही किसान आंदोलन, शाहीन बाग जैसे सर्व राष्ट्रविरोधी कार्रवाइयों को समर्थन दिया जाता है । वनवासियों पर हो रहे अत्याचारों की उपेक्षा मानवाधिकार संगठन एवं सरकार भी कर रही है ।
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