संपादकीय : खालिस्तान, बलूचिस्तान एवं पाकिस्तान !

जाब के अमृतसर में हिन्दुओं के ठाकुरद्वारा मंदिर में हाथबम से विस्फोट कराया गया। अब तक खालिस्तानी कनाडा, अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया, इन देशों में हिन्दुओं के मंदिरों की दीवारों पर कालिक पोत देते थे अथवा भारतविरोधी नारे लिख देते थे; परंतु पंजाब में पहली बार मंदिर पर इस प्रकार का आक्रमण किया गया । सौभाग्यवश इसमें प्राणहानि नहीं हुई। इस प्रकरण में पुलिस ने ३ लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि मुठभेड में एक आक्रमणकारी को मार गिराया। ये सभी आरोपी प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा से संबंधित हैं। उन्हें पाकिस्तानी हस्तकों से निर्देश दिए जा रहे थे। देश में विगत अनेक दशकों से खालिस्तान अर्थात सिखों के लिए अलग देश बनाने की मांग की जा रही है। ये खालिस्तानी पंजाबसहित हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर अलग खालिस्तान बनाने की मांग कर रहे हैं। उसे पाकिस्तान का अंदर से समर्थन है, यह स्पष्ट है। १९८० के दशक में पंजाब में खालिस्तानी आतंकियों ने हिन्दुओं को लक्ष्य बनाते हुए उनका नरसंहार किया था। उसके उपरांत यह आतंकवाद तोड डाला गया; परंतु पिछले कुछ वर्षाें से वह पुनः सिर उठाने का प्रयास कर रहा है। कनाडा के खालिस्तानियों से उन्हें सहायता मिल रही है तथा कनाडा में भी उनके द्वारा वहां के हिन्दुओं तथा भारतीय दूतावास को लक्ष्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडा उन्हें संरक्षण दे रहे थे। अब वे पद से हट चुके हैं; परंतु नए प्रधानमंत्री इस संदर्भ में क्या नीति अपनाते हैं ?, यह देखना पडेगा। अमृतसर की घटना की ओर गंभीरता से देखने की आवश्यकता है; क्योंकि यह आक्रमण बम से किया गया आक्रमण है ! पंजाब पुलिस ने एक आरोपी को मुठभेड में मार गिराया, तब भी उनकी जडें उखाड देनी चाहिए। पुलिस को आक्रमण होने के उपरांत कार्यवाही करने की अपेक्षा इस प्रकार आक्रमण ही न हो, ऐसी स्थिति बनानी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आने के पीछे खालिस्तानियों का समर्थन था। यदि आम आदमी पार्टी की यह मानसिकता है, तो  केंद्र सरकार को पंजाब में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करना आवश्यक है। पंजाब में हिन्दू नेताओं को लक्ष्य बनाकर मार डाला जा रहा है। ४ दिन पूर्व ही शिवसेना के (शिंदे गुट) जिलाप्रमुख मंगतराम राय की हत्या की गई। हत्या करनेवाले खालिस्तानी थे, यह बात सामने आ रही है। इससे पूर्व भी कुछ हिन्दू नेताओं को इसी प्रकार मारा गया है। इसकी ओर गंभीरता से देखा जाना चाहिए। एक ओर जहां खालिस्तानियों की गतिविधियां चल रही थी, उसी समय सिखों के पवित्र स्वर्ण मंदिर में एक मुसलमान ने श्रद्धालुओं पर आक्रमण किया, जिसमें ५ लोग घायल हुए। इस विषय में एक भी खालिस्तानी मुंह नहीं खोलता, इस तथ्य को स्वीकार करना होगा।

भारत को सफलता मिले !

जहां भारत एवं विदेशों में खालिस्तानियों की गतिविधियां चल रही हैं, ऐसे में पाकिस्तान में विगत ७८ वर्षों से बलूच लोग उनकी स्वतंत्रता की लडाई लड रहे हैं। अब तक इसमें लाखों बलूच नागरिकों ने बलिदान दिया है। वर्तमान समय में इस लडाई को अंतिम स्वरूप प्राप्त होता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले ३ दिन में बलूच लोगों के सशस्त्र संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी की ओर से पाकिस्तानी सेना पर आक्रमण किया गया। ‘इस संगठन को भारत समर्थन देता है तथा भारत उसकी सर्वाेपरि सहायता कर रहा है’, यह पाकिस्तान का आरोप है। इससे पूर्व पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार कर वे बलूच लोगों को आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए सहायता कर रहे हैं, यह आरोप लगाया था। कुलभूषण जाधव अभी भी पाकिस्तान के कारागृह में बंद हैं। ‘पाकिस्तान पिछले कुछ दशकों से कश्मीर एवं पंजाब में जो गतिविधियां चला रहा है, वैसी ही गतिविधियां भारत पाकिस्तान में भी चलाए’, ऐसा किसी भी देशभक्त को लगेगा ही; परंतु बलूचिस्तान का सूत्र संपूर्णरूप से भिन्न है। वह एक स्वतंत्र प्रदेश था। भारत का जब विभाजन हुआ, उस समय वह पाकिस्तान में अंतर्भूत नहीं था। विभाजन के उपरांत जिस प्रकार पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर आधा कश्मीर निगल लिया, उसी प्रकार उसने पूरा बलूचिस्तान निगल लिया। तब से वहां के लोग यह लडाई लड रहे हैं। उस समय बलूचिस्तान के सरहद गांधी अर्थात खान अब्दुल गफार खान तथा अन्य बलूची लोगों की यह इच्छा थी कि बलूचिस्तान को भारत से जोडा जाए; परंतु नेहरू ने उसे अस्वीकार किया। भारत यदि इस इतिहास को बदल रहा है, तो उसमें अनुचित क्या है ? पानीपत के युद्ध में मराठों की पराजय होने के उपरांत अब्दाली सैकडों मराठाओं को पकडकर अफगानिस्तान ले जा रहा था, उस समय बलूचिस्तान पहुंचने पर वे वही बंस गए। ऐसा कहा जाता है कि आज उनके वंशज बलूचिस्तान में हैं। उसके कारण भारत से उनका नाता बनता है। पाकिस्तान से यदि बलूचिस्तान स्वतंत्र हुआ, तो उसका भारत को क्या लाभ होगा, यह आनेवाला समय ही बता पाएगा; क्योंकि बांग्लादेश का उदाहरण हमारे सामने है; परंतु इस समय एक शत्रु राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान के नाक में दम करना आवश्यक है। पाकिस्तान ने भारत में, विशेषकर कश्मीर एवं पंजाब में, आतंकी गतिविधियां चलाकर भारत की प्राणहानि तथा आर्थिक हानि की, उसका उत्तर देना आवश्यक है। केवल बलूचिस्तान ही नहीं, अपितु अफगानिस्तान की सहायता कर पाकिस्तान को पाठ पढाने का भी प्रयास किया जाना चाहिए। वर्तमान में तालिबान वह कर ही रहा है। विगत ७८ वर्षाें में किसी भी भारतीय शासक ने पाकिस्तान को सीधे नष्ट करने का साहस नहीं दिखाया है। ‘पाकिस्तान भारत के लिए एक शाप है’, ऐसा आज तक के इतिहास से स्पष्ट होता है। पाकिस्तान नाम का देश यदि न होता, तो भारत और आगे बढ चु====का होता। बलूचिस्तान को भारत के प्रति तथा भारतीयों को बलूचियों के प्रति अपनापन है; परंतु क्या पाकिस्तान को तथा मुसलमानों को सिखों के प्रति अपनापन है ? खालिस्तानी सिखों ने जहां भारत में खालिस्तान की मांग की है, वहीं पंजाब का बडा भूभाग पाकिस्तान में है। खालिस्तानियों ने यह भूभाग खालिस्तान में अंतर्भूत हो, ऐसी कभी मांग नहीं की है। साथ ही मुसलमान आक्रमणकारियों ने तथा विभाजन के समय मुसलमानों ने सिखों का जो संहार किया, उसे यह खालिस्तानी जानबूझकर भूल रहे हैं। भविष्य में यदि खालिस्तान बन गया, तो यही पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के मुसलमान सिखों की हत्याएं कर खालिस्तान निगल लेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है। अतः पाकिस्तान केंद्रबिंदु है तथा इस केंद्रबिंदु को मिटाने के लिए भारत प्रयास कर ही रहा है। उसे सफलता मिले, यही भारतीयों की अपेक्षा है !

पाकिस्तान को विश्व के मानचित्र से मिटाने में केवल भारत का ही नहीं; अपितु पूरे विश्व का हित है, यह बात जब विश्व के समझ में आएगी, वह शुभ दिन होगा !