सामाजिक चेतना में होनेवाला परिवर्तन एवं उससे उत्पन्न आगामी आपातकाल का ज्योतिषशास्त्रीय विवेचन

‘वर्तमान में विश्व में युद्धजन्य परिस्थितियां बनी हुई हैं । वैश्विक व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) बदल रही है । वैश्विक व्यवस्था में होनेवाला यह परिवर्तन केवल एक संयोग नहीं है, यह समाज की चेतना (जागरूकता) में होनेवाले परिवर्तनों का दृश्य परिणाम है । समाज की चेतना में होनेवाले परिवर्तन और उनके आगामी समय में संभावित परिणामों का विवेचन इस लेख में ज्योतिषशास्त्र के दृष्टिकोण से किया गया है ।

मनुष्य जीवन की संकीर्णता से व्यापकता की ओर होनेवाली प्राकृतिक यात्रा दर्शानेवाले जन्मकुंडली के १२ स्थान !

हिन्दू धर्म में प्रत्येक बात का कितना गहनता से तथा सूक्ष्म विचार किया गया है, इसके उदाहरण के रूप में यह लेख प्रकाशित कर रहे हैं !

हिन्दू नववर्ष के ग्रहयोग : ज्योतिषशास्त्रीय विश्लेषण !

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ‘काल’ अनंत तथा अविभाज्य है, फिर भी हमारे हिन्दू ऋषि-मुनियों ने सांसारिक एवं व्यावहारिक समतुल्य समय को चार युगों (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग), सहस्रयुग, शतक, दशक, वर्ष, मास, दिन, घटी, पल और विपल जैसी विभिन्न इकाइयों में विभाजित करते समय मापन की उचित पद्धति स्थापित की ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का पटना, बिहार में ‘अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष, वास्तु और तंत्र सम्मेलन’ में सम्मान 

हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने यह सम्मान ग्रहण किया !
धर्म एवं आध्यात्म के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया !

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और पारंपरिक ज्योतिषशास्त्र में भेद !

ऐसा ध्यान में आता है कि, अधिकांश विज्ञापनदाताओं का उद्देश्य ‘व्यक्ति की समस्याओं का समाधान होकर वह आनंदमय जीवन जी पाए’, इसकी अपेक्षा ‘इस व्यवसाय के माध्यम से अधिकाधिक ग्राहकों को आकर्षित कर धन प्राप्त करना है ।’ 

किसी व्यक्ति की ‘अंतर्मुखता’ दर्शानेवाले ग्रहयोगों का विवेचन !

जन्मपत्रिका के द्वारा व्यक्ति की मूल अंतर्मुखता कितनी है, इसका बोध हो सकता है । अंतर्मुखता का महत्त्व एवं अंतर्मुखता दर्शानेवाले ग्रहयोगों का विवेचन आगे दिया गया है ।

Astrologer Dr. Anil Vaidya : वर्ष २०२६-२७ में भारत ‘हिन्दू राष्ट्र’ के रूप में घोषित होने की संभावना !

अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष-भाष्यकार डॉ. अनिल वैद्य की भविष्यवाणी
वर्ष २०२५ से २०३२ का काल विश्व के लिए अत्यंत कठिन

अगले ६ महीने युद्ध का महासंकट – प्रसिद्ध ज्योतिषी सिद्धेश्वर मारटकर

‘सनातन प्रभात’ने विगत अनेक वर्षाें से आनेवाले महाविनाशकारी आपातकाल के विषय में ‘जनता को आपातकाल की तैयारी कैसे करनी चाहिए ?’, इस विषय में लेखमालाएं प्रकाशित की हैं ।

फाल्गुन पूर्णिमा (३.३.२०२६) इस दिन का होने वाला खग्रास चंद्रग्रहण (ग्रस्तोदित), ग्रहण काल में पालन किए जाने वाले नियम और राशियों के अनुसार मिलने वाले फल !

भारत के साथ-साथ पूर्वी एशिया, जापान, रूस के मध्य तथा पूर्वी भाग, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूरे अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका के कुछ भागों में यह चंद्रग्रहण दिखाई देगा।

व्यक्ति में विद्यमान ‘ईश्वर के प्रति का भाव’, इस घटक को दर्शानेवाले ग्रहयोगों का विवेचन !

प्रत्येक साधक में विद्यमान भाव का स्वरूप भिन्न होता है । इस लेख में व्यक्ति में विद्यमान ‘भाव’, इस घटक को दर्शानेवाले ग्रहयोगों का विवेचन किया गया है ।