छावा – कल, आज और कल का… !

‘छत्रपति संभाजी महाराज का जीवन पराक्रम, त्याग एवं बलिदान का ज्वलंत उदाहरण है। कुछ दिन पूर्व ही प्रदर्शित ‘छावा’ नामक हिन्दी चलचित्र ने उनके जीवन के प्रसंगों का सजीव चित्रण किया है। औरंगजेब के अमानवीय छल के सामने भी छत्रपति संभाजी महाराज ने झुकना अस्वीकार कर दिया। उनका बलिदान देखकर संपूर्ण महाराष्ट्र ही नहीं, अपितु संपूर्ण देश के लोगों की मानो सांसें रुक गईं; परंतु यह चलचित्र देखने के उपरांत हमें अपनेआप से प्रश्न करना चाहिए, ‘अब आगे क्या ?’

छत्रपति संभाजी महाराज

१. कल का छावा – छत्रपति संभाजी महाराज : शौर्य, विद्वत्ता, स्वाभिमान एवं धर्मनिष्ठा के प्रतीक !

छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना की, जबकि छत्रपति संभाजी महाराज ने उसकी रक्षा करने का कार्य किया। केवल ११ वर्षाें के कार्यकाल में उन्होंने स्वराज्य पर आए असंख्य संकटों का धैर्य से सामना किया। उन्होंने मुगल, पुर्तगालियों तथा अंग्रेजों से भी प्रभावी लडाईयां लडीं।  औरंगजेब ने उन्हें बंदी बनाकर इस्लाम स्वीकार करने का हठाग्रह किया; परंतु छत्रपति संभाजी महाराज ने अपना धर्म एवं स्वाभिमान संजोकर अत्यंत अमानवीय छल सहा तथा अंत में बलिदान दिया। इस कारण उन्हें ‘धर्मवीर’ उपाधि दी जाती है।

श्री. अमोल बधाले

२. आज का छावा – आज का युवक : संस्कार, त्याग, नीतिमानता एवं धर्मनिष्ठा की आवश्यकता !

आज की युवा पीढी में छत्रपति संभाजी महाराज के गुण किस मात्रा में हैं ? उनकी जयंती बडे उत्साह से मनाई जाती है; परंतु उनके विचारों का अनुकरण करनेवाले सच में कितने युवक हैं ? देश के विकास के अंतर्गत युवकों का सहभाग दिखाई देता है; परंतु उनमें राष्ट्राभिमान एवं धर्माभिमान का अभाव प्रतीत होता है। आज के समाज में अन्याय, भ्रष्टाचार एवं अधर्म वृद्धिंगत हुआ है; परंतु इसके विरुद्ध खडे रहनेवाले बहुत ही अल्प लोग हैं।

‘धर्म की रक्षा करना’ भी उतना ही आवश्यक है’, यह बात कितने लोग ध्यान में लेते हैं ?

छत्रपति संभाजी महाराज ने संकटों का सामना कर धर्म एवं स्वराज्य संजोया। यदि ऐसा है, तो फिर आज का युवक स्वधर्म की हो रही हानि को देखते हुए भी चुप क्यों हैं ? क्या सही है ?, केवल इतिहास सुनना, या उसका आदर्श लेकर मार्गक्रमण करना ?

क्या आज का युवक सच में छावा बन सकता है  ? : उसके लिए उसे त्याग, कष्ट एवं धर्माभिमान, इन तत्त्वों का अंगीकार करना पडेगा। संस्कार, नैतिकता एवं धर्मनिष्ठा के माध्यम से ही सक्षम राष्ट्र की रचना हो सकती है !

छत्रपति संभाजी महाराज ने हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु प्राणार्पण कर दिया; परंतु धर्म एवं संस्कृति से सुलह नहीं किया। आज की पीढी द्वारा भी हिन्दू संस्कृति एवं परंपराओं की रक्षा करना आवश्यक है। धर्म का अर्थ केवल पूजा नहीं है, अपितु उसमें विद्यमान संस्कार, नीतिमूल्यों का आचरण, धर्मव्यवस्था एवं अपनी परिवार-व्यवस्था संजोना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।

३. आनेवाले कल का छावा : आगामी पीढी के लिएप्रेरणा, संस्कार एवं धर्मरक्षा !

यदि आज हम छत्रपति संभाजी महाराज के विचार आत्मसात करते हैं, तो आनेवाले कल की पीढी अपनेआप सक्षम बनेगी। आनेवाले कल का छावा अर्थात वह पीढी जो सत्य, धैर्य, न्याय एवं धर्मरक्षा हेतु लडेगी !

– श्री. अमोल बधाले, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.