पूर्वजों की दिनचर्या पुरानी नहीं, अपितु आश्चर्यजनक रूप से उन्नत है !

प्राचीन भारतीय ज्ञान ‘आरोग्य विज्ञान’ के रूप में पुनः लौटा है !

विश्वयुद्ध अटल होने के कारण स्वरक्षा एवं साधना को सर्वोच्च प्राथमिकता दें !

‘वर्तमान में वैश्विक स्तर पर अत्यधिक उथल-पुथल हो रही है । वैश्विक स्तर पर विश्वयुद्ध अटल है तथा आगामी ५ से ७ वर्ष अत्यंत भीषण युद्धजन्य परिस्थिति सर्वत्र रहनेवाली है । यह काल अर्थात एक प्रकार से ‘संधिकाल’ (संक्रमण काल) है ।

शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति के लिए स्वभावदोष, प्रमाद और संभ्रम को दूर करें !

स्वभावदोष और प्रमाद पर हम अपने प्रयासों से विजय प्राप्त कर सकते हैं; परंतु संभ्रम की अवस्था को दूर करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अथवा गुरुकृपा ही आवश्यक होती है । गुरुरूप संतों का मार्गदर्शन ग्रहण करना ही संभ्रम दूर करने का सर्वोत्तम उपाय है ।

आपातकाल में संरक्षण प्राप्त करने के लिए ईश्वर के भक्त बनें !

आपातकाल की स्थूल तैयारी के साथ ही, भाव, त्याग, शरणागति और अहं-निर्मूलन के माध्यम से आत्मिक तैयारी भी करें । इस गुरुपूर्णिमा पर ऐसा करने का दृढ संकल्प करें तथा सहस्र गुना कार्यरत गुरुतत्त्व का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें !’

साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !

यदि सनातन संस्था, उसके संतों और साधकों के विषय में कोई आपत्तिजनक लेखन अथवा वक्तव्य करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी जानकारी अपने क्षेत्र के उत्तरदायी धर्मप्रचारक संतों को दें । – न्यासी, सनातन संस्था.

स्थानीय स्तर पर गुरुपूर्णिमा महोत्सव में सहभागी हों !

सनातन संस्था आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव में सम्मिलित होने के लिए निकटवर्ती कार्यक्रम स्थल की जानकारी हेतु यहां दिया ‘क्यू.आर. कोड’ स्कैन करें !’ (सुविधा हेतु स्थल की Google location भी दी गई है ।)

अर्पणदाताओ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में धर्मकार्य हेतु धन अर्पित कर गुरुतत्त्व का लाभ लें !

गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरुसेवा एवं धन का त्याग करनेवाले व्यक्ति को गुरुतत्त्व का सहस्रों गुना लाभ होता है ।

साधको, वर्तमान आपातकाल में रात्रि के समय व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें तथा अपरिहार्य परिस्थिति में ही आध्यात्मिक स्तर के उपचार कर रात को यात्रा करें !

बस/रेल से रात्रि में लंबी दूरी की यात्रा करते समय बरती जानेवाली सावधानी !

वर्णानुसार साधना का महत्त्व एवं चारों वर्णाें की साधना करवाकर मोक्ष प्रदान करनेवाली गुरुकृपायोगानुसार साधना

क्या एक-एक वर्ण के अनुसार साधना पूर्ण कर मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है अथवा आगे-आगे के वर्णों की साधना एकत्रित कर शीघ्र मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है ? (१४.१.२०२५)

परात्पर गुरु पांडे महाराजजी द्वारा वर्णित सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की महानता !

आध्यात्मिक विषयों पर संवाद करते समय परात्पर गुरु पांडे महाराजजी गीता के अध्याय प.पू. डॉक्टरजी को सुनाते थे । उस समय प.पू. डॉक्टरजी परात्पर गुरु पांडे महाराजजी से बोले,