यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !

किसी भी कार्य को गति देने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है । रामराज्य की स्थापना की प्रक्रिया मुख्य रूप से आध्यात्मिक स्तर से संबंधित होने के कारण रामराज्य की स्थापना को गति देने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा ही आवश्यक है ।

राजमातंगीदेवी के विषय में

देवी मातंगी आदिशक्ति की प्रधानमंत्री होने के कारण उन्हें ‘राजमातंगी’ कहा गया है । वर्तमान में संपूर्ण विश्व पर युद्ध का संकट मंडरा रहा है । ऐसे समय में तपोभूमि भारत की रक्षा के लिए ‘राजमातंगी’ देवी का कवच अत्यंत आवश्यक है ।

मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !

देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।

सनातन संस्था का कार्य अदभुत एवं हिन्दुत्व के लिए संजीवनी है ! – पंडित गौरांग गौरीजी, कथावाचक, वृंदावन

यहां चल रहे लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आध्यात्मिक आयोजन में वृंदावन से आई पंडित गौरांग गौरीजी से सनातन संस्था के साधक श्री. रणजीत सिंह ने भेंट कर उन्हें संस्था के उद्देश्यों से परिचित कराया

यज्ञ करने के पीछे सच्चिदानंद परब्रह्म डॉक्टरजी का व्यापक एवं उदार उद्देश्य !

वैदिक धर्मपरंपरा में यज्ञ केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, अपितु उसे समष्टि के कल्याण हेतु दिव्य साधना माना गया है । हमारे ऋषि-मुनियों ने यज्ञसंस्कृति के द्वारा विश्वकल्याण का मार्ग दिखाया । उस परंपरा को आगे बढाते हुए गुरुदेवजी ने अब तक विभिन्न यज्ञों का आयोजन किया है ।

झारखंड एवं पूर्वोत्तर भारत में ‘रामराज्य निर्माण अभियान’ के अंतर्गत विविध उपक्रम संपन्न

सनातन संस्था द्वारा आयोजित इस अभियान के अंतर्गत जमशेदपुर, धनबाद एवं कोलकाता के विभिन्न मंदिरों में ‘मनौती मांगना’, ‘मंदिर स्वच्छता अभियान’ जैसे उपक्रम आयोजित किए गए ।

हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए यज्ञ समारोह एवं समष्टि धर्मप्रसार !

श्री राजमातंगी महायज्ञ का फल आगामी युद्ध काल में भारत की रक्षा होने पर सभी को दिखाई देगा ! आदिशक्ति की ‘प्रधानमंत्री’ श्री राजमातंगी देवी ने इस यज्ञ के माध्यम से जो आध्यात्मिक तेज एवं ओज प्रदान किया, वह राष्ट्र को विजयपथ पर ले जाएगा !

१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंश सनातन संस्था को अर्पित !

श्रीचित्शक्ति श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा लाए गए ४ शिवलिंगों का साधकों ने भोलेनाथ के जयघोष एवं वेदमंत्रोच्चार के साथ भावपूर्ण स्वागत किया । इस समय श्रीसत्शक्ति श्रीमती बिंदा सिंगबाळजी ने शिवलिंगों का पूजन एवं औक्षण किया ।

गोवंश की हत्या के विरोध में उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रशासन एवं उच्च न्यायालय की उचित भूमिका !

इस प्रकरण की विशेषता यह है कि जंगल में घटित गोवंश की हत्या के विषय में भी उत्तर प्रदेश के हिन्दुत्वनिष्ठों ने जागरूकता से आंदोलन किया । उसका संज्ञान लेते हुए पुलिस एवं प्रशासन ने आरोपियों पर तुरंत बंदी बनाने की कार्रवाई की । दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में ऐसा होना दुर्लभ है ।’

वास्तु लाभकारी होने के लिए ध्यान में रखने योग्य सूत्र !

कुंडली अर्थात हमारे जन्म के समय आकाश की ग्रहस्थिति का मानचित्र ! उसमें हम परिवर्तन नहीं कर सकते । वह हमारे जीवन के अंत तक वैसी ही बनी रहती है; परंतु हम वास्तु में अपने लिए अनुकूल परिवर्तन कर उसे लाभकारी बना सकते हैं ।