सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

एकमात्र हिन्दू धर्म ही मानवजाति का तारणहार है !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी

‘मानव का जन्म क्यों हुआ ? जन्म के पूर्व वह कहां था ? मृत्यु के उपरांत वह कहां जाएगा ? इत्यादि विषयों की थोडी-बहुत भी जानकारी न रखनेवाले पश्चिमी तथा साम्यवादी क्या कभी मानवजाति की समस्याएं दूर कर पाएंगे ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर ही नहीं अपितु उनमें अशुभ से कैसे बचें, इसकी जानकारी रखनेवाला एकमात्र हिन्दू धर्म ही मानवजाति का तारणहार है !’


अध्यात्म का प्रसार करते समय यह स्मरण रखें ! 

‘ईश्वर का अस्तित्व न माननेवाले क्या कभी ईश्वरप्राप्ति के लिए साधना करने का विचार कर सकते हैं ? साधक अध्यात्मप्रसार करते समय ऐसे लोगों से बात करने में समय व्यर्थ न करें !’


भारत की दुर्दशा का एक कारण है, राज्यकर्ताओं द्वारा जनता को साधना न सिखाना !

‘ स्वतंत्रता से लेकर आज तक के सभी राज्यकर्ताओं ने केवल बौद्धिक शिक्षा के माध्यम से वैद्य, अभियंता, वकील तैयार किए; पर उन्हें साधना सिखाकर ‘संत’ बनने की शिक्षा नहीं दी । इस कारण आज देशद्रोह से लेकर घुसपैठ तक सभी प्रकार की समस्याओं का यह देश सामना कर रहा है ।’- सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले