कोरोना प्रतिबंधक वैक्सिन के कारण हुई मृत्यु के लिए केंद्र सरकार उत्तरदायी नहीं !

हमें मृत व्यक्ति और उसके परिवार के विषय में संपूर्ण सहानुभूति है; लेकिन वैक्सिनेशन के उपरांत व्यक्ति पर हुए किसी भी प्रतिकूल परिणाम के लिए हमें उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, ऐसा प्रतिज्ञापत्र केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किया ।

अवैध कागद-पत्रों (दस्तावेजों) पर हस्ताक्षर करने के लिए मुझ पर डाला दबाव !

राज्यपाल द्वारा लगाया गया आरोप गंभीर होने के कारण केंद्र सरकार को इसकी जांच करनी आवश्यक !

अफजलपुर (कर्नाटक) के शासकीय विद्यालय में लाई गई कब्र को प्रशासन ने हटवाया !

भाजपा सरकार के शासनकाल में शासकीय विद्यालय में इस तरह से कब्र लाने का साहस कैसे हुआ और स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षक कैसे कुछ नहीं बता रहे हैं ? ऎसे प्रश्नों का हिन्दुऒऺ के मन में उठना स्वाभाविक है !

अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना विद्यापीठ ने सिख छात्रों को कृपाण (छोटा चाकू) ले जाने की अनुमति दी !

सिखों के १०वें गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों के लिए ५ वस्तुएं अनिवार्य की थीं ।  इसमें केश, कडा, कृपाण, कचेरा (अंतःवस्त्र) और कंघा होता है ।

घरेलू गैस सिलेंडर पर अब दिखेगा ‘क्यूआर् कोड’ !

घरेलू गैस सिलेंडर अब शीघ्र ही ‘क्यूआर् कोड’ से जोड़े जाएंगे, ऐसी जानकारी पेट्रोलियममंत्री हरदीपसिंह पुरी ने १७ नवंबर को दी । इस ‘क्यूआर् कोड’ से गैस सिलिंडर का सही स्थान समझ आने के साथ सिलेंडर की चोरी रोकना भी संभव होगा ।

गिरजाघर के पादरियों को सरकारी कोष से वेतन का भुगतान क्यों किया जाना चाहिए ?

‘आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी स्वयं ईसाई हैं, इसी कारण सरकारी कोष का धन पादरियों पर उड़ाया जा रहा है’ ? यदि कोई यह कहता है तो इसमें उसका का क्या दोष !

पतंजलि की ५ औषधियों पर लगाया प्रतिबंध उत्तराखंड सरकार ने गलत बताकर हटाया।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार के ‘आयुर्वेद और यूनानी अनुज्ञप्ति प्राधिकरण’ ने केरल के डॉ. के.वी.बाबू की शिकायत के उपरांत झूठा विज्ञापन किए जाने का कहकर योगऋषि रामदेवबाबा की पतंजलि प्रतिष्ठान की दिव्य फार्मेसी की ५ औषधियों पर प्रतिबंध लगाया था ।

अफझलखान के मकबरे के समीप अवैध निर्माण किया ध्वस्त !

हिन्दुत्वनिष्ठों के २० वर्षाें के संघर्ष को सफलता !
पुलिस की कडी चौकसी; परिसर में जमावबंदी लागू !

भ्रष्टाचारी लोग देश का बेडागर्क कर रहे हैं ! – उच्चतम न्यायालय

जो जनता को प्रतिदिन अनेक वर्षों से दिख रहा है, वही आज उच्चतम न्यायालय कह रहा है । यह स्थिति सभी पार्टी के शासनकर्ताओं को भी ज्ञात है, तब भी यह स्थिति बदलने के लिए कोई भी ठोस और कठोर प्रयास नहीं करते, यह भारतीयों के लिए लज्जास्पद है !

धर्मांतरित ईसाई तथा मुसलमानों को आरक्षण समान लाभ देना संभव नहीं !

‘हिन्दुओं की जाति व्यवस्था के कारण हमारे साथ छल होता है’, ऐसा कहकर धर्म-परिवर्तन करनवालों को धर्म भी परिवर्तित करना है तथा पूर्व के लाभ भी चाहिए ! यह उनकी दोहरी नीति ही है !