नई दिल्ली – देश में अगले वर्ष से प्लास्टिक के नोट प्रचलन में आ सकते हैं । इसका प्रारम्भ १० तथा २० रुपये के छोटे नोटों से होगा । ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ (आर.बी.आई.) के नोट मुद्रणालय की बेंगलुरु शाखा ने ‘ओपेसिफाइड पॉलिमर सबस्ट्रेट शीट्स’ की आपूर्ति के लिए विश्वभर की संस्थाओं से निविदाएं आमंत्रित की हैं । देश में प्लास्टिक के नोटों की शीट बनाने वाली कोई संस्था नहीं है । हाल ही में आर.बी.आई. के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया था कि १० तथा २० रुपये के पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है । ‘पायलट प्रोजेक्ट’ (परीक्षण) के रूप में इसकी कार्यवाही करने के लिए अध्ययन चल रहा है ।
१. आर.बी.आई. के अनुसार, १० तथा २० रुपये के नोट सर्वाधिक मात्रा में प्रचलन में रहते हैं तथा शीघ्र खराब हो जाते हैं । इसके कारण प्रतिवर्ष बडी संख्या में नोट बदलने पडते हैं । इस पर प्रतिवर्ष सहस्रों करोड रुपये का व्यय होता है । पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक समय तक टिकते हैं । इन नोटों पर पानी तथा गन्दगी का अल्प प्रभाव होता है ।
२. इन नोटों में जाली नोटों पर अंकुश लगाने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा । ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं ब्रिटेन सहित ६० देशों में चयनित मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोट पहले से ही प्रचलन में हैं । पिछले १६ वर्षों में पॉलिमर मुद्रा को प्रचलन में लाने का यह देश का तीराप्रयास है ।

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